मोहाली। सत्र न्यायालय ने एक व्यवसायी से 4 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में दो आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका रद्द कर दी है। आरोपी अमितेश्वर प्रताप सिंह और इंदरवीर सिंह पनेसर रिश्ते में जीजा-साला हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। यह मामला सोहाना पुलिस थाने में बीएनएस की धारा 318(4) और 316(2) के तहत दर्ज है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेश आहलुवालिया ने यह महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। अदालत ने माना कि जीजा-साला ने मिलकर व्यवसायी को झूठा झांसा दिया। उन्होंने व्यवसायी से अपने खाते में 4 करोड़ 5 लाख रुपये की रकम डलवाए। आरोपियों ने वादे के अनुसार काम न करके व्यवसायी के साथ धोखाधड़ी की। जानकारी के अनुसार, आरोपी मोहाली के सेक्टर-77 के निवासी हैं। उन्होंने मोहाली के व्यवसायी तरनजीत सिंह के साथ एक समझौता किया था। समझौते में उन्होंने बताया था कि उनकी गांव हंसाली में एक फैक्टरी है। वे तरनजीत सिंह को 50 मीट्रिक टन के हिसाब से 300 मीट्रिक टन तक की पराली तैयार करवाकर आपूर्ति करेंगे।
धोखाधड़ी का पूरा मामला
तरनजीत सिंह ने आरोपियों की कंपनी ''देने प्लांट'' के साथ 17 जनवरी 2025 को एक समझौता किया था। आरोपियों ने सामग्री खरीदने और सामान तैयार करने के लिए तरनजीत सिंह से करीब 4 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि मांगी थी। शिकायतकर्ता ने आरटीजीएस के माध्यम से यह रकम आरोपियों की कंपनी के खाते में हस्तांतरित कर दी। माल की आपूर्ति अगस्त 2025 तक होनी थी। हालांकि, एक साल बीत जाने के बाद भी आरोपियों ने न तो माल की आपूर्ति की और न ही शिकायतकर्ता के पैसे वापस किए। इसके बाद तरनजीत सिंह की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया।
अदालत का रुख और वकील की दलील
शिकायतकर्ता के वकील जतिन सैनी ने अदालत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि अदालत ने यह माना कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता से करीब 4 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। सैनी ने तर्क दिया कि यह कोई छोटी रकम नहीं है। ऐसे हालात में आरोपियों को जमानत नहीं मिलनी चाहिए। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए अग्रिम जमानत याचिका रद्द कर दी।
अन्य मामले और कानूनी कार्रवाई
वकील जतिन सैनी ने यह भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अमितेश्वर प्रताप सिंह और इंदरवीर सिंह पनेसर के खिलाफ मोहाली अदालत में एक चेक बाउंस का मामला भी चल रहा है। इस मामले में उनके खिलाफ वारंट भी जारी हो चुके हैं। यह तथ्य आरोपियों के खिलाफ अन्य कानूनी कार्रवाई को उजागर करता है। अदालत ने इन सभी पहलुओं पर विचार किया।