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Mohali News: ऑपरेशन को इंश्योरेंस में कवर करने की दी मंजूरी, बाद में किया मना, हर्जाना

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पंचकूला। टाटा एआईजी इंश्योरेंस कंपनी ने स्वास्थ्य बीमा धारक को अस्पताल में भर्ती करने की मंजूरी देने, उसके बाद अस्पताल का बिल चुकाने से इनकार करने पर उपभोक्ता आयोग ने पांच हजार रुपये हर्जाना लगाया है। उपभोक्ता आयोग ने टाटा एआईजी इंश्योरेंस कंपनी को 43 हजार 447 रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही 5500 रुपये अदालती खर्चा अदा करने का आदेश दिया है। पंचकूला सेक्टर सेक्टर-7 के रहने वाले अजय सिंगला ने वकील पंकज चांदगोठिया के माध्यम से उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायतकर्ता ने बताया था कि उसने अपनी पत्नी प्राशु बंसल की 15 मार्च 2018 को टाटा एआईजी इंश्योरेंस की मेडिप्राइम पॉलिसी 12 हजार 817 रुपये में खरीदी थी। उसकी पत्नी को 01 मार्च 2019 को पेट में तेज दर्द हुआ। उसे पारस ब्लिस अस्पताल में लेकर जाया गया जहां डॉक्टरों ने मेडिकल जांच करने के बाद उसे लौपरोटॉमी ऑपरेशन की सलाह दी।
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वकील पंकज चांदगोठिया ने अदालत में दलील दी कि अस्पताल ने पुष्टि की कि सर्जरी उनकी पॉलिसी के तहत कवर की जाएगी और यहां तक कि बीमा कंपनी ने 1 मार्च 2019 को उनकी पत्नी को अस्पताल में भर्ती करने के लिए कैशलेस प्राधिकरण दिया, जिसके बाद तीन मार्च 2019 को ऑपरेशन किया गया। बाद में बीमा कंपनी ने अस्पताल का बिल चुकाने से इनकार कर दिया। 43 हजार 447 रुपये दावे को इस आधार पर खारिज कर दिया कि पत्नी की सर्जरी और उपचार बांझपन से संबंधित था जो पॉलिसी के तहत कवर नहीं किया गया था। इलाज करने वाले डॉक्टर ने भी प्रमाणित किया था कि सर्जरी केवल बाएं डिम्बग्रंथि पुटी के इलाज के लिए थी और इसका बांझपन के इलाज से कोई लेना-देना नहीं था। शिकायतकर्ता ने आर्थिक और मानसिक नुकसान की भरपाई के लिए बीमा कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में केस फाइल किया था।
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