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अपराजिता : समाज के सशक्त होने पर होगा महिला सशक्तिकरण

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जीरकपुर। महिला सशक्तिकरण ऐसा शब्द जो कि महिलाओं के सशक्त होने की बात करता है। परंतु महिला सशक्तिकरण का दम भरने वाला प्रशासन अब तक जीरकपुर जैसे विकसित क्षेत्र में महिलाओं को न तो सामाजिक सुरक्षा दे सका है न ही पुलिस सुरक्षा। हालात यह हैं कि इतने बड़े जीरकपुर में महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थानों पर शौचालयों तक की व्यवस्था नहीं है। जीरकपुर वीआईपी रोड स्थित श्रीरत्नम के मीटिंग रूम में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम के दौरान जीरकपुर की महिलाओं ने पेश आने वाली समस्याओं को साझा किया। कुछ महिलाओं का कहना कि यहां मेडिकल सुविधाएं तक नहीं हैं, इतना ही नहीं स्ट्रीट लाइटें न होने से भी महिलाओं की सुरक्षा संदेह के घेरे में है।
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हेल्प लाइन तक नहीं है यहां
पांच साल से मैं जीरकपुर में रहती हूं। अगर कोई महिला कहीं मुसीबत में फंस जाए तो उसके लिए कोई हेल्प लाइन नहीं है। अभी कुछ समय पहले मेरी एक दोस्त की चेन वीआईपी रोड पर कोई छीनकर भाग गया। यह हादसा दिन दहाड़े हुआ था परंतु कोई कुछ मदद नहीं कर सका। जिन्होंने चेन छीनी उनका पता तक नहीं लगा। क्षेत्र के लिहाज से देखें तो यहां पर कभी भी कोई भी हादसा हो सकता है। यहां कम से कम महिला पुलिस की टीम तो होनी चाहिए। -प्रीति गुप्ता, गृहणी और भारत विकास परिषद की सदस्य
महिलाओं के लिए सुरक्षा नहीं
मैं अपने स्कूल में लड़कियों को सेल्फ डिफेंस सिखा रही हूं। खुद यू ट्यूब से देखती हूं, जानकारी लेती हूं और उसके बाद लड़कियों को सिखाती हूं। मेरे स्कूल में रोजाना बच्चे आते हैं, उनको मैं पढ़ाती भी हूं। मैं तो यह कर रही हूं पर इसमें कुछ ही बच्चे हैं। ऐसी क्लास हर जगह होनी चाहिए। मैं यदि जीरकपुर की स्थिति पर कहूं तो यहां महिलाओं की सुरक्षा खतरे में ही है। -निहारिका गर्ग, समाजिक कार्यकर्ता और बिजनेस वुमेन
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पहले हम ज्यादा सुरक्षित थे
मैं 22 साल से प्रीत कालोनी में रह रही हूं। यह एक गांव जैसा था। जहां लाइटें नहीं लगी थीं। परंतु हम रात को भी कहीं जाते थे तो अपने आप को सुरक्षित महसूस करते थे। 12 वर्ष में यहां काफी विकास हो चुका है लेकिन अब सुरक्षा खत्म हो चुकी है। रोजाना जीरकपुर में बच्चियों और महिलाओं के साथ हो रही दुर्घटनाओं की खबरें मिलती हैं। एक बात और कि यहां पर यदि महिलाओं के साथ कुछ घटना हो तो हम किसको बताएंगे। -सिमरन बेदी प्रेसीडेंट, इनरव्हील क्लब जीरकपुर
सुरक्षा के नाम पर दिखावा
जीरकपुर में महिला सुरक्षा के नाम पर सिर्फ दिखावा ही है। न तो यहां महिला पुलिस कर्मी हैं न ही कोई हेल्प लाइन नंबर। हालात खराब हैं सुरक्षा के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है। स्ट्रीट लाइटें जलती नहीं हैं, जहां जलती हैं वहां इतनी कम रोशनी है कि कुछ ठीक से नजर नहीं आता है। सुरक्षा देनी है तो यहां पर हरेक एंट्री प्वाइंट पर जीरकपुर प्रशासन की ओर से सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाने चाहिए और इसके साथ ही स्ट्रीट लाइटों को भी ठीक करना चाहिए। -सरोज भारद्वाज, गृहणी
खुलेआम होती है धोखाधड़ी
मैं बैंक जा रही थी तो एक आंटी वहीं पर मुझको मिली। उन्होंने गहने पहने थे, उनके साथ किसी ने धोखाधड़ी की ओर उनके गहने लेकर भाग गया। आंटी क्या करती, पुलिस को बताया भी पर कोई फायदा नहीं हुआ। ऐसा लगता है जैसे यहां सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। जीरकपुर में सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। महिला पुलिस कर्मियों को यहां तैनात करना चाहिए। ताकि धोखाधड़ी जैसी घटनाओं पर काबू पाया जा सके। -भारती राय, गृहणी
अवारा लड़कों का जमावड़ा
मेरी बेटी शाम सात बजे बाजार गई थी, वहां उसको दो लड़के कमेंट्स पास करने लगे। मेरी बेटी वहां किससे कुछ बताती? हां, यदि महिला पुलिस होती तो शायद अपनी बात कह सकती थी। यहां की समस्या यह है कि शाम होते ही यहां पर आवारा टाइप के युवाओं का जमावड़ा लगने लगता है। जीरकपुर के वीआईपी रोड पर कोेई बस सेवा नहीं है, इसके साथ ही यहां से आटो ही एकमात्र साधन है। यहां इतना ज्यादा अंधेरा होता है कि कोई भी घटना हो सकती है। -दिव्या नैय्यर, हीलिंग थेरेपिस्ट
सिर्फ कैब पर ही है भरोसा
मुझे कहीं बाहर जाना होता है तो मैं ओला या ऊबर करती हूं। जीरकपुर में सबसे ज्यादा समस्या ट्रैफिक की है। इसके साथ ही यहां पर लाइटें नहीं हैं, जिसकी वजह से महिलाएं असुरक्षित हैं। यहां स्ट्रीट लाइट्स लगवाई जानी चाहिए, सीसीटीवी कैमरे लगाने चाहिए और महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करना चाहिए। यहां महिला पुलिस कर्मियों का होना सबसे ज्यादा आवश्यक है। जिससे कि महिलाएं कम से कम अपनी बात तो कह सकें। -विनीत कौर, उद्यमी
जीरकपुर में सेफ्टी की जरूरत
मैं एक स्टूडेंट हूं। मुझे लगता है कि जीरकपुर में सेफ्टी की जरूरत है। यहां महिला पुलिस कर्मियों को तैनात किया जाना चाहिए। जिससे ताकि महिलाएं ज्यादा से ज्यादा सुरक्षित हो सकें। इसके साथ ही हमको यहां पर हेल्पलाइन नंबर भी देना चाहिए। सबसे आवश्यक बात यह है कि सुरक्षा उपकरण लगाए जाएं, जिसके माध्यम से हम अपराधी को न सिर्फ पकड़ सकेंगे बल्कि उसमें डर भी पैदा कर सकेंगे। जीरकपुर में यह इनिशिएटिव लेना चाहिए। -कृसा जैस्मिन, स्टूडेंट
यहां काफी लड़कियां पीजी में रहती हैं। इनके पास अपने वाहन तक नहीं होते हैं। यह लड़कियां शाम सात बजे के बाद ही घर लौटती हैं। ऐसे में सिक्योरिटी होेना आवश्यक है। लड़कियों की सुरक्षा के लिए यहां पुख्ता प्रबंध करना बेहद जरूरी हो गया है। यहां काफी ऐसा वर्ग है जो कि ड्रग्स लेता है। ऐसे में यदि रात को घर लौटते वक्त लड़कियों के साथ कोई हादसा हो जाए तो कौन जिम्मेदार होगा। -रेनू, इनरव्हील की सदस्य
अभी तीन साल की बच्ची के साथ अश्लील हरकत की गई। ऐसे में हम किसके ऊपर विश्वास कर सकते हैं। हमको सिर्फ सड़कों ही नहीं बल्कि अब तो स्कूलों तक में सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था करवानी होगी। यहां कुछ ऐसी टीमें होनी चाहिए जो कि स्कूलों पर नजर रख सकें। इसके साथ ही हमारे इलाके में लेडी कांस्टेबल का होना आवश्क है।-पूनम जग्गा, गृहणी
एक बड़ी समस्या है शिक्षा की कमी। यहां पर शिक्षा काफी कम है, जिसकी वजह से ऐसी घटनाएं होती हैं। एक बात और कि इस क्षेत्र में रात के समय क्लब कल्चर बढ़ गया है। इसकी वजह से भी लड़कियों के साथ ऐसी घटनाएं होने का अंदेशा बढ़ गया है। ऐसे में यहां पर सुरक्षा का होना जरूरी हो जाता है। -डॉ. ऋचा सेतिया, होम्योपैथिक फिजिशियन
हमको सशक्त बनना होगा। बेशक हमको सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। ऐसे में हमें खुद को ही तैयार करना होगा। जहां तक हमको लगता है कि यहां सीसीटीवी कैमरे लगवाना और स्ट्रीट लाइटें ठीक करवाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। वास्तव में अब ज्यादातर महिलाएं काम करती हैं और ऐसे में उनको घर से निकलने से लेकर घर पहुंचने तक की सुरक्षा चाहिए। -मंजू शर्मा, सेक्रेटरी इनरव्हील क्लब
एंबुेलेंस और महिला पुलिस यहां काफी आवश्यक है। महिला पुलिस होने से हम एकदम सुरक्षित रहेंगे। यहां सीसीटीवी भी होना आवश्यक है। इसके साथ ही यहां की एक महत्वपूर्ण समस्या है सफाई। जीरकपुर में सफाई की व्यवस्था ठीक से करनी चाहिए। महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यहां स्ट्रीट लाइट्स लगानी आवश्यक हैं। सोनम, हाउस वाइफ
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