बलौंगी। स्थानीय निकाय विभाग द्वारा प्रस्तावित नगर निगम की नई हदबंदी से बलौंगी, बड़ माजरा और आसपास के कई अन्य गांवों को बाहर रखने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ गांव बलौंगी में इलाका निवासियों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई, जिसमें लोगों ने सरकारी कार्रवाई पर सख्त नाराजगी जाहिर की। इस बैठक में पिंड बचाओ कमेटी, दशमेश मार्केट एसोसिएशन बलौंगी, बलौंगी बाईपास एसोसिएशन, बलौंगी पीजी एसोसिएशन जैसी विभिन्न संस्थाएं मौजूद रहीं।
समाजसेवी नरेश कुमार नेशी ने कहा कि यह बड़े दुख की बात है कि शहर का हिस्सा बन चुके इन गांवों को जानबूझकर नगर निगम की सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। बलौंगी और बड़ माजरा, बल्लोमाजरा जैसे क्षेत्रों में पहले से ही गंभीर समस्याएं हैं, जिनमें न तो सही सड़कें हैं, न सीवरेज सिस्टम और न ही साफ-सफाई का कोई ठोस प्रबंध है। जब ये गांव शहर से सटे हुए हैं और यहां के निवासी हर तरह के टैक्स अदा कर रहे हैं तो फिर उन्हें निगम की सीमा में शामिल करके बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं दी जा रही हैं।
संघर्ष तेज करने की चेतावनी
मीटिंग में यह फैसला लिया गया कि अगर सरकार ने अपने फैसले पर फिर से विचार नहीं किया और इन गांवों को नगर निगम में शामिल नहीं किया तो आने वाले दिनों में तीखा संघर्ष शुरू किया जाएगा और इसकी सारी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस अवसर पर अनिल कुमार, बलविंदर सागर, ललित कुमार, सुरिंदर रूप राय, कुलवंत सिंह, अमृतपाल और इलाका निवासी मौजूद रहे।