नयागांव। नगर काउंसिल की सत्ता पर शिरोमणि अकाली दल का कब्जा है। विधानसभा चुनाव से पहले नगर काउंसिल में सत्ताधारी पक्ष की ओर से आरोप लगाए जाते थे कि सरकार विकास के लिए काउंसिल को बजट नहीं दे रही है। इसके चलते विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जबकि अब विपक्षी पार्षद सत्ताधारी पक्ष पर आरोप लगा रहे हैं कि नगर काउंसिल उनके इलाके में विकास कार्य नहीं कर रही है। वहीं, राज्य में नई सरकार बनने के साथ इलाके की राजनीति भी गरमा गई है।
2021 में हुए नगर काउंसिल चुनाव में शिरोमणि अकाली दल 10 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। लेकिन एक भाजपा पार्षद के समर्थन के साथ वह नगर काउंसिल में अपना प्रधान बनाने में भी कामयाब रही थी। अब विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद एक बार फिर इलाके में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। क्योंकि विधानसभा चुनाव के दौरान कुछ पार्षदों ने आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया था । इनमें ज्यादातर कांग्रेस के पार्षद थे। विपक्षी पार्षदों की नगर काउंसिल की प्रधान की कुर्सी पर नजर है। इसके लिए वह गुटबाजी भी कर रहे हैं। वहीं अकाली दल के नेताओं द्वारा नगर काउंसिल में पूर्ण बहुमत का दावा किया जा रहा है। नगर काउंसिल में चल रही गुटबाजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विधानसभा चुनाव से पहले हुई नगर काउंसिल की बैठक में विपक्षी पार्षदों द्वारा विकास कार्य न होने का हवाला देते हुए सदन में रखे गए सभी प्रस्ताव खारिज कर दिए गए थे। ऐसे में इलाके के लोग विकास की उम्मीद में बैठे हैं। इलाके के सभी विकास कार्य ठप पड़े हुए हैं। राजनेताओं द्वारा की जा रही इस राजनीति के कारण इलाके के सभी कार्य बंद पड़े हैं। लोगों का कहना है कि इलाके के पार्षदों को राजनीति से ऊपर उठकर इलाके के विकास के लिए कार्य करना चाहिए।
दूसरी पार्टी से पार्षदों के वार्ड में नहीं हो रहे काम
विपक्षी पार्षदों ने नगर काउंसिल प्रधान और अधिकारियों पर आरोप लगाए हैं कि विपक्षी पार्षदों के वार्डों में कोई भी विकास कार्य नहीं हो रहे हैं। गलियों में ढक्कन टूटे पड़े हैं और सड़कों की मरम्मत नहीं हो रही है। साफ सफाई के लिए भी नगर काउंसिल के धक्के खाने पड़ रहे हैं। मंगलवार को आम आदमी पार्टी का दामन थाम चुके पार्षद गुरप्रीत सिंह पप्पी एवं भाजपा पार्षद के पति सुरेंद्र बब्बल ने नगर काउंसिल के कार्यकारी अधिकारी से मुलाकात कर विकास कार्य न होने की शिकायत की एवं अपना एक मांग पत्र भी सौंपा ।
बहुमत के लिए चाहिए 11 पार्षद
इलाके की नगर काउंसिल में कुल 21 पार्षद हैं। इनमें से बहुमत के लिए 11 पार्षदों की जरूरत पड़ती है। नगर काउंसिल चुनाव के नतीजों में सबसे ज्यादा 10 पार्षद अकाली दल, छह पार्षद कांग्रेस, तीन पार्षद भाजपा एवं दो पार्षद निर्दलीय जीते थे। लेकिन मौजूदा समय में 11 पार्षद अकाली दल, 3-3 पार्षद भाजपा, आम आदमी पार्टी एवं कांग्रेस और एक पार्षद आजाद समर्थन में नजर आ रहे हैं। अगर विपक्षी पार्षद एकजुट होते हैं, तो उन्हें अपना प्रधान बनाने के लिए अभी भी शिरोमणि अकाली दल के पार्षदों में जोड़तोड़ करनी पड़ेगी।