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किडनैपिंग केसः पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी के बाद चार अन्य आरोपियों को भी मिली जमानत

Wed, 20 May 2020 12:26 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, मोहाली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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29 साल पुराने आईएएस के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी के अपहरण मामले में पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी के बाद तत्कालीन चार पुलिस मुलाजिमों को मोहाली जिला अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई है। इसके साथ ही सभी आरोपियों को मामले की जांच में शामिल होने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा प्रत्येक आरोपी को 50 हजार रुपये बांड भरने को कहा है। इन चार आरोपियों में हरसहाय शर्मा, जागीर सिंह, अनूप सिंह और कुलदीप सिंह शामिल हैं। यह उस समय चंडीगढ़ पुलिस में सब इंस्पेक्टर और असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे। वहीं, अब सभी रिटायर हो चुके हैं।
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मिली जानकारी के मुताबिक उक्त लोगों ने इसी मामले में पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी को जमानत मिलने के बाद अदालत की शरण ली थी। वहीं, उन्होंने सैनी की अग्रिम जमानत को भी आधार बनाया था। इसके बाद मामले में अदालत में दोनों पक्षों ने अपनी दलील रखी। अदालत ने आखिर में अग्रिम जमानत को मंजूरी दे दी है और 7 दिन में इन्वेस्टिगेशन ज्वाइन करने को कहा है। इन सभी को अपने पासपोर्ट सरेंडर करने हैं और कोर्ट की अनुमति बिना कहीं नहीं जा सकेंगे। हालांकि पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी इस मामले में पहले ही इन्वेस्टिगेेशन ज्वाइन कर चुके हैं। उनसे दो बार पूछताछ की जा चुकी है।

यह है पूरा मामला
मिली जानकारी के मुताबिक पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी और 8 अन्य लोगों पर एक आईएएस के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी के अपहरण संबंधी 29 साल पुराने मामले में मोहाली के मटौर थाने केस दर्ज हुआ है। यह घटना वर्ष 1991 की है जब सुमेध सिंह सैनी चंडीगढ़ के एसएसपी थे। उन पर एक आतंकी हमला हुआ था। इसमें सैनी का तो बचाव हो गया था लेकिन उनकी सुरक्षा में तैनात 4 जवानों की मौत हो गई थी। फिर आरोप लगा कि चंडीगढ़ की पुलिस ने सैनी के इशारे पर मोहाली से बलवंत सिंह को जबरन उठा लिया था। इसके बाद वह कभी घर नहीं लौटा।
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बलवंत सिंह मुल्तानी के भाई पलविंदर सिंह मुल्तानी और उनके परिवार ने इस मामले में काफी लंबी जंग लड़ी। आखिरकार पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों पर एक प्राथमिक जांच की गई। इसके बाद सीबीआई की ओर से दो जुलाई 2008 को मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को इस आधार पर रद्द कर दिया कि हाईकोर्ट बेंच के पास केस का निपटारा करने के लिए अधिकार क्षेत्र की कमी है। शिकायतकर्ता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने परिवार को नए सिरे से कार्रवाई की आजादी दी थी।
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