मोहाली। एनआरआई अनूप सिंह कहलों की गिरफ्तारी और 130 करोड़ की हेरोइन बरामद करने के बाद भी पुलिस अब तक इस कारोबार के किंगपिन जगदीश सिंह भोला तक नहीं पहुंच सकी है। पुलिस ने अर्जुन अवार्डी भोला के फेज दस स्थित घर पर छापा मारा था, लेकिन तब तक वह निकल चुका था। इस केस में कई गिरफ्तारियां होने के बाद भी पुलिस न तो भोला और न ही उसके नेटवर्क का पता लगा सकी है।
दरअसल भोला इतना शातिर है कि उसके साथ के लोगों को भी उसकी भनक नहीं लगती। सरगना भोला नशे का कारोबार अनूप सिंह जैसे कई लोगों के जरिए करता था, लेकिन उनके बारे में किसी को भी नहीं पता। पुलिस ने भोला का वह मोबाइल नंबर निकाला, जिससे वह अनूप सिंह से बात करता था। पर उसकी कॉल डिटेल से अब तक पुलिस को कुछ खास हासिल नहीं हो सका। क्योंकि भोला के जितने भी ड्रग नेटवर्क थे, वह सभी से अलग-अलग नंबरों से बात करता था। इसलिए अनूप सिंह से भोला तक पहुंचने का पुलिस का रास्ता वहीं बंद हो गया।
भोला के मामले में पुलिस के सामने पुलिस की ट्रेनिंग ही आड़े आ रही है। रुस्तम-ए-हिंद भोला को खेल के दम पर पुलिस की नौकरी मिली और वह डीएसपी पद तक जा पहुंचा। उसे पुलिस ट्रैप की सारी जानकारी है और तोड़ भी पता हैं। भोला पहले हेरोइन की तस्करी करवाता था, पर धीरे-धीरे उसने और राजा कंदोला ने सिंथेटिक ड्रग्स का कारोबार शुरू कर लिया। पार्टी ड्रग आइस या स्पीड की फैक्टरी भी लगा ली, क्योंकि यह उन्हें ज्यादा मुनाफे का काम लगा। दोनों के बड़े नेटवर्क पंजाब से ही ऑपरेट हो रहे थे और विदेशों तक फैले थे। भोला को 2009 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने मुंबई में 25 किलो सिंथेटिक ड्रग मेथाम्फेटामाइन के साथ पकड़ा भी था। वहीं अनूप सिंह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जब उसके फेज दस स्थित घर पर छापा मारा तो वहां से भी सिंथेटिक ड्रग बनाने वाला दस किलोग्राम केमिकल मिला था।