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जीरकपुर में 50 हजार टन कूड़ा डंप, शहर के भूजल को खतरा, पानी में घुलेगा जहर

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जीरकपुर। शहर के नजदीकी गांव बिशनपुरा में 50 हजार टन कूड़ा बिना निस्तारण प्रोसेसिंग के रखा गया है। जो पिछले 15 साल से यहां पर डंप किया जा है। यहां पर डंप किया जा रहा हजारों टन कूड़ा भूजल में जहर घोल रहा है। साथ ही वायु प्रदूषण के लिए भी खतरा बना हुआ है। कई योजनाएं बनीं, लेकिन इस कचरे का निपटान अब तक नहीं हो पाया कि इस कूड़े को कहां डाला जाए, प्रशासन के लिए यह एक चुनौती बन गया है। सबसे खतरनाक स्थिति यह है कि जमीन पर पड़ा कूड़ा बरसात के पानी को रीचार्ज करने के साथ भूजल तक उन खतरनाक रसायन को पहुंचा रहा है, जो पानी में मिलने के बाद लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। जमीन पर पड़े कूड़े के कारण जहां जमीन जहरीली हो रही है, वहीं बरसात के समय यह कूड़ा भूजल को भी जहरीला बना रहा है, लेकिन न तो आज तक यहां की मिट्टी के सैंपल लिए गए हैं और न ही भूजल स्तर की जांच की गई। अगर समय रहते जीरकपुर के डंप कूड़े का निस्तारण नहीं किया गया तो आने वाले समय में भूजल पूरी तरह से दूषित हो जाएगा और लोगों को पेयजल शुद्घ नहीं मिल पाएगा और इस जहरीले पानी से लोग बीमार होने लगेंगे। बता दें कि कभी भी यहां डंप किए गए कूड़े की जगह की मिट्टी की सैंपलिंग नहीं की गई है, और यह मामला प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों की जानकारी में भी नहीं है।
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कूड़े के बैक्टीरिया और कार्बनिक पदार्थ का जमीन में हो रहा रिसाव
म्यूनिसपल वेस्ट को अगर लंबे समय तक बिना प्रोसेस किए रखा जाता है तो उसमें से बैक्टीरिया और हानिकारक कार्बनिक पदार्थों का रिसाव जमीन में होने लगता है। सालों एक जगह कूड़ा पड़े रहने से यह रिसाव इतना हो जाता है कि यह भूजल के लेवल तक पहुंच जाता है, जिसकी वजह से आसपास के पानी में बैक्टीरिया आने लगते हैं। ऐसे पानी से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी भी हो सकती है। वहीं कूड़े में मिथैन गैस बनने के कारण आग लगकर वायुमंडल में धुआं ही धुआं हो जाता है। इसके अलावा बिना प्रोसेस किए गए कूड़े से फास्जीन गैस निकलती है जो कि शरीर में ऑक्सीजन को जाने से रोकती है।
कंप्यूटर और बैटरियों का कचरा सबसे खतरनाक
जानकारी के मुताबिक सबसे खतरनाक कूड़ा तो बैटरियों, कंप्यूटरों और मोबाइल का होता है। इसमें पारा, कोबाल्ट और न जाने कितने किस्म के जहरीले रसायन होते हैं। एक कंप्यूटर का वजन लगभग 3.15 किलो ग्राम होता है। इसमें 1.90 किग्रा लेड और 0.693 ग्राम पारा और 0.04936 ग्राम आर्सेनिक होता है, शेष हिस्सा प्लास्टिक का होता है। इनमें से अधिकांश सामग्री गलती-सड़ती नहीं हैं और जमीन के संपर्क में आकर मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित करने और भूगर्भ जल को जहरीला बनाने का काम करती है। ठीक इसी तरह का जहर बैट्रियों और बेकार मोबाइलों से भी उपज रहा है।
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भूजल बचाना है, तो जल्द शुरू करना होगा कूड़ा निस्तारण
जीरकपुर के भूजल को बचाना है, कूड़ा निस्तारण मशीन का संचालन जल्द से जल्द शुरू करना होगा। ताकि हजारों टन डंप कूड़े का निस्तारण हो सके। लेकिन बरसात के चलते काम बीच में ही लटक गया है। क्योंकि कूड़ा गीला हो गया है। निस्तारण करने लायक नहीं है। इस बाबत जब जीरकपुर नगर परिषद के चीफ सैनिटेशन अधिकारी राजिंदर सिंह से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि कूड़ा निस्तारण के लिए हम तैयार हैैं, लेकिन अभी तक बिजली की सप्लाई हमें नहीं मिली है, वहीं दूसरी ओर बरसात ने भी काम बिगाड़ दिया है।
कोट
अभी हाल ही में कार्यभार संभाला है। जीरकपुर के बिशनपुरा में डंप किए गए कूड़े की जगह की मिट्टी की सैंपलिंग हुई है या नहीं, मामला मेरे संज्ञान में नहीं है।
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- रनतेज शर्मा, एसडीओ।
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