मोहाली। औद्योगिक कर्मचारियों और उनके परिवारों को कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के तहत मुफ्त और सहज इलाज मुहैया कराने का लक्ष्य पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। कर्मचारियों से 4% योगदान लेने के बावजूद मोहाली क्षेत्र में ईएसआईसी का स्वास्थ्य ढांचा बेहद कमजोर है। मोहाली में लगभग 3,85,000 इंश्योर्ड कर्मचारी और उनके परिजन रहते हैं, जबकि ईएसआईसी अस्पताल केवल 30 बेड का है। दिल्ली मुख्यालय के 11 जुलाई 2022 के नियमों के मुताबिक इस संख्या के लिए कम से कम 400 बेड का अस्पताल होना जरूरी है।
ईएसआईसी अस्पताल के लिए बिस्तर और आबादी का मानक
बिस्तर की संख्या कैचमेंट क्षेत्र में न्यूनतम इंश्योर्ड कर्मचारी
100 50,000
150 1,00,000
200 1,50,000
250 2,00,000
300 2,50,000
350 3,00,000
400 3,50,000
500 4,00,000
600 5,00,000
नियम : इंश्योर्ड लोगों की संख्या 25 किमी की त्रिज्या में मानी जाती है। 50 किमी के भीतर कोई दूसरा ईएसआई अस्पताल नहीं होना चाहिए।
होती है परेशानी
कम बिस्तर और अपर्याप्त सुविधाओं के कारण गंभीर बीमारियों या रोजगार से जुड़ी चोट की स्थिति में श्रमिकों को सिविल हॉस्पिटल फेज-6, जीएमसीएच-16, जीएमसीएच-32 और पीजीआई चंडीगढ़ भेजा जाता है। इन अस्पतालों के साथ ईएसआईसी का कोई टाई-अप नहीं है। परिणामस्वरूप इलाज के खर्च खुद उठाने पड़ते हैं। बाद में सीजीएचएस (केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना) रेट्स पर लंबी प्रक्रिया के बाद ही रिइंबर्समेंट मिलता है।
नए दिशा-निर्देश
- अस्पतालों के लिए आगामी पांच साल, डिस्पेंसरी के लिए तीन साल की अनुमानित आबादी के आधार पर योजना बनाई जाएगी।
- अधूरी लागू क्षेत्रों में नई डिस्पेंसरी कर्मचारियों की संख्या के अनुसार बनाई जाएगी।
- यदि किसी इलाके में मानक पूरे नहीं होते, तो सरकारी या प्राइवेट अस्पताल के साथ टाई-अप करके प्राथमिक और द्वितीयक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
ईएसआईसी को मोहाली का अस्पताल और सभी डिस्पेंसरी सीधे अपने हाथ में लेकर चलानी चाहिए। इससे श्रमिकों और उनके परिवारों को पूरी तरह कैशलेस और परेशानी मुक्त इलाज मिलेगा। -जसबीर सिंह, अध्यक्ष, मोहाली इंडस्ट्रीज एसोसिएशन और श्रम कानून विशेषज्ञ