मोहाली। दो वरिष्ठ नागरिकों से 4.03 करोड़ रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। ठगों ने 75 वर्षीय बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर 1.20 करोड़ जबकि निवेश का झांसा देकर 70 वर्षीय बुजुर्ग से 2.83 करोड़ रुपये ठग लिए। साइबर पुलिस ने दोनों बुजुर्गों की शिकायत पर बीएनएस और आईटी एक्ट की धारा के तहत मामला दर्ज किया है।
पहला मामला ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश करने के नाम पर ठगी करने का है। बरनाला निवासी सेवानिवृत्त 70 वर्षीय बुजुर्ग सुखमिंदर सिंह गिल का कहना है कि धोखाधड़ी की शुरुआत अप्रैल 2025 में हुई। उन्हें फेसबुक पर आईएफईएक्स कैपिटल का विज्ञापन मिला। फेसबुक विज्ञापन का जवाब देने पर कुछ व्यक्तियों ने उनसे संपर्क किया। उन लोगों ने खुद को आईएफईएक्स कैपिटल के वरिष्ठ ट्रेडिंग सलाहकार और खाता प्रबंधक बताया। उन्होंने बाजार के रुझानों, ट्रेडिंग रणनीतियों और लाभ की संभावनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने 21 हजार रुपये की प्रारंभिक सदस्यता शुल्क से शुरुआत की। वे विभिन्न उद्देश्यों के लिए अलग-अलग नंबरों से कॉल करते थे। इसमें वरिष्ठ सलाहकार, बाजार विश्लेषक, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के अलावा अन्य प्रमुख थे। इस दौरान ऑनलाइन ट्रेडिंग इंटरफेस नजर आता था। इसमें बाजार डेटा और ट्रेडिंग विकल्प, व्यापक चार्ट विश्लेषण उपकरण और तकनीकी संकेतक, विस्तृत पोर्टफोलियो ट्रैकिंग और लाभ/हानि विवरण, संपूर्ण लेन-देन इतिहास और खाता शेष प्रदर्शित करता था। इस प्रकार धोखेबाजों ने विश्वास में लेकर अलग-अलग समय में कभी 1.85 लाख, कभी 12 लाख तो कभी 18 लाख रुपये निवेश करवाए। इस तरह आरोपियों ने कुल 2.83 करोड़ रुपये निवेश करवा लिए। बाद में न तो मुनाफा दिया और न ही उनके निवेश किए रुपये वापस किए। साइबर पुलिस ने सुखमिंदर के दिए बैंक खाते, मोबाइल नंबर के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
जीरकपुर के बुजुर्ग को दिखाया गिरफ्तारी का डर
दूसरे मामले में ठगों ने 75 वर्षीय सीनियर सिटीजन को तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर 1.20 करोड़ रुपये ठगे। जब बुजुर्ग को ठगी का अहसास हुआ तब तक रुपये हाथ से जा चुके थे। शिकायतकर्ता विवेक गुप्ता निवासी त्रिशला सिटी जीरकपुर ने साइबर पुलिस स्टेशन फेज-4 में मामले की शिकायत दी है। विवेक गुप्ता के अनुसार उनके बेटों ने एचडीएफसी बैंक में उनके नाम पर 90 लाख रुपये फिक्स डिपाजिट खोला था। इसके अलावा उनके पास भारतीय स्टेट बैंक में एक वरिष्ठ नागरिक बचत खाता भी थ। उसमें तीस लाख रुपये थे। 18 सितंबर को उनके मोबाइल पर एक कॉल आयी। कॉल करने वाले ने बताया कि उनका मोबाइल नंबर जल्द ही सभी सेवाओं से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। डर के मारे और कॉलर के निर्देशों का पालन करते हुए, उन्होंने अपने फोन पर 9 नंबर दबाया। कॉल एक व्यक्ति से जुड़ी। उसने खुद को कोलाबा पुलिस स्टेशन मुंबई का एक पुलिस अधिकारी बताया। आरोपी ने बताया कि उनके आधार कार्ड का उपयोग करके एक मोबाइल पंजीकृत किया गया है। यह गंभीर आपराधिक शिकायतों से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि सीबीआई शाखा अगले दिन मामले को संभालेगी और उनसे संपर्क करेगी। उन्हें निर्देश दिया गया कि इस मामले पर परिवार के सदस्यों सहित किसी से भी चर्चा ना करें। डर और घबराहट में उन्होंने अपना आधार नंबर बताया। अगले दिन 19 सितंबर 2025 को उन्हें दूसरे नंबर से कॉल आया। आरोपी ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया। उन्होंने झूठा आरोप लगाया कि उनके बैंक खातों से लाखों रुपये के अवैध लेनदेन हुए हैं। उन्हें तुरंत गिरफ्तार करने की धमकी दी गई। उन्होंने डर दिखाकर बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट में रखा। उन्हें घर से बाहर न निकलने और किसी से बात न करने की हिदायत दी। ठगों ने बुजुर्ग से 19 सितंबर को 10 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए। उसी दिन 50 लाख रुपये और एक्सिस बैंक में ट्रांसफर करवाए। धोखेबाजों ने उन्हें बाद में एक नकली भुगतान रसीद भेजी। दूसरा लेनदेन 20 सितंबर को हुआ। उन्होंने फिर से फोन किया और 40 लाख रुपये की मांग की। यह राशि भी उन्होंने उनके बताए खाते में ट्रांसफर कर दी। तीसरा लेनदेन उसी दिन 20 लाख उनके पेंशन खाते से किया गया। ठग अब तक बुजुर्ग से 1.20 करोड़ रुपये ठग चुके थे। इतनी राशि लेने के बाद धोखेबाजों ने फिर से फोन किया और अधिक रुपयों की मांग की। उन्हें एहसास हुआ कि पुलिस और सीबीआई अधिकारियों का नाम लेकर उनको धोखा दिया जा रहा है।
पहले हो चुकी वारदातें
- 8 जून 2025 को फेज-6 निवासी 71 वर्षीय सीनियर सिटीजन चरणजीत कौर को तीन दिन डिजिटल अरेस्ट कर 1.03 करोड़ रुपये ठगे।
- 3 सितंबर को जालसाजों ने सीबीआई अधिकारी बनकर आवास एवं शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव से 58.5 लाख रुपये ठगे।
- रिटायर्ड आईएएस अफसर हरजिंदर सिंह चाहल को भी डिजिटल अरेस्ट कर 76 लाख रुपये ठगे गए थे।
92 करोड़ की ठगी करने वाले छह अपराधी भी हो चुके गिरफ्तार
साइबर क्राइम ने अलग-अलग राज्यों में छापा मारकर डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करने के मामले में दो गिरोह के छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह करीब 92 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है। दोनों गिरोह में दस लोग शामिल थे। चार लोगों की गिरफ्तारी होनी बाकी है। आरोपियों की पहचान तनावर याज्ञनिक, वित्तराग एम. साह, धवल और निमेश के रूप में हुई थी
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डीएसपी साइबर क्राइम रूपिंदर सोही की लोगों से अपील
- सबसे पहले नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर पर करे कॉल
- साइबर धोखाधड़ी से जुड़े हर तरह के सुबूत को एकत्रित करके रखें
- ठगी होने के बाद एक से तीन घंटे के भीतर करें शिकायत, पैसे मिलने की संभावना ज्यादा
-1930 पर फोन नहीं उठाने पर साइबर क्राइम की वेबसाइट पर रिपोर्ट करें
-मोबाइल में अनजाने लिंक पर ना करें क्लिक और ना ही करें एपडाउनलोड
-शेयर मार्केट में निवेश करें तो सेबी से पंजीकृत एप्लीकेशन का ही उपयोग करें
-साबइर ठगी के फोन आने पर आप घबराएं नहीं नंबरों को ब्लॉक कर दें या फोन काट दें