मोहाली। वर्ष-2006 में मोहाली को जिला बनाया गया था और अब जिला बने 18 साल बीत चुके हैं। इसके बावजूद अभी तक पुलिस मुलाजिमों को सुविधाएं देने के लिए अपनी पुलिस लाइन नहीं बनाई गई है। क्योंकि जिले की पुलिस लाइन अभी भी किराए की फैक्टरी में चलाई जा रही है। जब मोहाली जिला बना था तो लोगों की उम्मीद थी कि उनको प्रशासकीय कामों के लिए रोपड़ के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, लेकिन ऐसा अब तक नहीं हुआ, अब भी जिले की अपनी पुलिस लाइन नहीं बनाई गई है।
जानकारी के मुताबिक 10 साल बाद सरकार ने इसके लिए सेक्टर-76 में जिला प्रबंधकीय कांप्लेक्स बनाते लोगों को सभी सुविधाएं एक ही हुए छत के नीचे देने की योजना को साकार कर दिया। विभाग ने इसके लिए दो-तीन जगह भी देखी हैं, लेकिन इसके फाइनल होने का इंतजार हो रहा है। इस बारे में 2021 में उस समय के एसएसपी ने गमाडा को पत्र भी लिखा था लेकिन अब तक जगह नहीं मिल पाई है। अब मौजूदा एसएसपी दीपक पारीक भी मोहाली में पुलिस लाइन को लेकर तेज गति से काम कर रहे हैं। इनके अनुसार जल्द ही मोहाली जिले को अपनी नई पुलिस लाइन मिल जाएगी। इनका कहना है कि विभाग द्वारा लाइन को लेकर जगह देखी गई है और जल्द ही इस संबंधी कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक मोहाली में पुलिस लाइन बनाने के लिए सबसे बड़ी दिक्कत जगह की है। यहां पर जगह की कीमत ज्यादा होने के कारण विभाग शहर के आसपास पुलिस के लिए जगह निश्चित नहीं कर पा रहा है। इस कारण वीआईपी सिटी कहे जाते शहर की पुलिस लाइन अभी खस्ता हालत किराए की फैक्टरी में चल रही है। जिले में अभी पुलिस की लाइन औद्योगिक क्षेत्र फेज-7 में चल रही है लेकिन वहां जगह की तंगी है। नई पुलिस लाइन बनाने के लिए दो-तीन जगह देखकर चर्चा की गई है।
पहले फेज-11 के सामुदायिक केंद्र में थी पुलिस लाइन
2006 में रोपड़ से अलग करके जब मोहाली जिला बनाया गया तो अस्थायी तौर पर पुलिस लाइन को फेज-11 स्थित सामुदायिक भवन से चलाया जा रहा था। काफी समय तक यह यहीं से चलती रही, लेकिन लोगों के विरोध के बाद इसे यहां से बदलकर इंडस्ट्रियल एरिया फेज-7 में स्थित इंडस्ट्री विभाग के एक बंद पड़ी फैक्टरी में भेज दिया गया। अब यह कई साल से यहीं से चल रही है।
किराए के घरों में रहने को मजबूर पुलिसकर्मी
मोहाली में पुलिस लाइन नहीं होने के चलते यहां पर ट्रांसफर होकर आने वाले पुलिस स्टाफ को सबसे पहले रहने के लिए घर का इंतजाम करना पड़ता है। किराए के घर होने के चलते कई बार उन्हें मकान मालिक से दिक्कत की वजह से घर भी बदलना पड़ता है। इन सबके बीच उनके लिए अपना काम सही ढंग से करना मुश्किल हो जाता है।