पहले से की थी तैयारी
बताया जा रहा है कि नैब सिंह धार्मिक प्रवृत्ति के इंसान थे और गुरुघर की सेवा से जुड़े हुए थे। उन्होंने एक दिन पहले ही अपने पीटर रेहड़े में सूखी लकड़ियां इकट्ठा करके रख ली थीं। वह साइकिल पर सवार होकर अपने घर से निकले। उन्होंने चीमा बस अड्डे के पास बनी निहंग छावनी के पास अपनी साइकिल खड़ी की और वहां से अपना पीटर रेहड़ा लेकर आगे चल दिए। सुबह साढ़े चार से पौने पांच बजे के बीच वह अनाज मंडी पहुंचे और वहां रेहड़े के अंदर ही खुद को आग लगा ली।
घर से मिला सुसाइड नोट
पुलिस को जांच के दौरान मृतक के घर से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। इस पत्र में गुरनैब सिंह ने साफ तौर पर लिखा है कि वह अपने अंतिम संस्कार के लिए जरूरी सामग्री जैसे लकड़ियां, तेल, डीजल, पेट्रोल और घी आदि अपने साथ लेकर जा रहा है। इसके अलावा, उसी पत्र में उन्होंने अपने एक रिश्तेदार के साथ पैसों के लेनदेन का पूरा हिसाब-किताब भी लिखा हुआ है।
डीएसपी खैरा ने बताया कि आग इतनी भयानक थी कि शव बुरी तरह झुलस चुका था। शव की शिनाख्त की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे पोस्टमार्टम और डीएनए टेस्ट के लिए सिविल अस्पताल सुनाम के शवगृह में रखवा दिया गया है। पुलिस मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है।