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महिलाएं बोलीं - जरूरत पड़ी तो बच्चों संग दिल्ली बार्डर पर जाने को तैयार

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लुधियाना। कृषि कानूनों के खिलाफ शनिवार को चक्का जाम सफल बनाने के लिए महिलाएं भी घरों से निकलकर धरनास्थल पर पहुंची। किसान यूनियनों के झंडे को हाथ में लेकर महिलाओं ने केंद्र सरकार का जमकर विरोध किया। महिलाओं का कहना था कि जरूरत पड़ी तो वह दिल्ली बार्डर पर चल रहे धरने में भी बच्चों के साथ जाने के लिए तैयार हैं।
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वहीं चक्का जाम में युवाओं की भूमिका भी अहम रही। चाहे लाडोवाल टोल प्लाजा हो या फिर लुधियाना फिरोजपुर रोड। हर जगह पर चक्का जाम में युवाओं की संख्या ज्यादा रही।
लाडोवाल टोल प्लाजा पर धरने पर पहुंचीं मनप्रीत कौर ने बताया कि उनके गांव की ज्यादातर महिलाओं ने चक्काजाम में शामिल होने के लिए शुक्रवार शाम से तैयारी शुरू कर दी थी। गांव लाडोवाल की सभी महिलाएं सुबह ही धरने में शामिल होने के लिए घर से निकल पड़ी थी, वह अपने बच्चों को भी साथ लेकर आई है। केंद्र सरकार से यह तीनों कानून उनके लिए मौत का वारंट है, इसलिए जब तक इन कानूनों को वापस नहीं लिया जाएगा, वह इसी तरह आंदोलन में हिस्सा बनेगी।
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गांव कादिया के युवा जगरूप सिंह ने बताया कि वह किसान आंदोलन से शुरू से जुड़ा है, उसके गांव के सभी युवा आज के धरने में पहुंचे हैं। वह खुद कई बार दिल्ली बार्डर पर जाकर लौट चुका है। कानून वापसी तक वह इस संघर्ष का हिस्सा बनें रहेंगे, कृषि कानूनों को हर हाल में वापस करवा कर ही दम लेंगे। केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए वह आसपास के गांवों के युवाओं से संपर्क साध रहे हैं।
चक्का जाम को लेकर कारोबारी पहले से थे सतर्क
औद्योगिक नगर लुधियाना के कारोबारियों को पहले से चक्काजाम का पता था, इसलिए उन्होंने अपने काम को पहले से तीन घंटे के लिए रोक लिया था। निटवेयर क्लब लुधियाना प्रधान विनोद थापर ने बताया कि तीन घंटे के चक्काजाम को देखते कारोबारियों को जो माल बाहर भेजना था या फिर जो भी बाहर से मंगवाना था, उसे होल्ड कर दिया था। चाहे कारोबार को कुछ नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन वह सभी किसानों के साथ है।
यूनाइटेड साइकिल पार्ट्स मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन प्रधान डीएस चावला ने बताया कि चक्काजाम से कोई नुकसान नहीं हुआ है। अगर कोई माल दोपहर को भेजना था, उसे तीन घंटे बाद भेज दिया जाएगा। किसान आंदोलन के साथ सभी एकजुट होकर खड़े हैं।
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