अचानक बारिश के चलते खेत से लेकर अनाज मंडियों में धान की फसल पूरी तरह से भीग गई। किसान अपनी फसल को बचाने के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। कई इलाकों में खेतों में डेढ़ फुट तक पानी भर गया, धान की पक्की फसल इस पानी में समा गई। वहीं, तेज हवाओं के कारण धान की पक्की फसल खेतों में बिछ चुकी है।
मौसम में बदलाव को किसी प्राकृतिक आपदा से कम नहीं माना जा सकता है लेकिन कृषि विभाग के अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। लुधियाना के मुख्य कृषि अधिकारी डॉक्टर नरिंदर पाल सिंह बैनीपाल के अनुसार इससे कोई ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। जो फसल बिछी है, उसे कुछ दिन बाद काटा जा सकता है। वहीं, अनाज मंडियों में धान को सुखाकर दोबारा बेचा जा सकता है। उनके मुताबिक जिला लुधियाना में एक फीसदी नुकसान होने की संभावना है।
‘हर जगह नुकसान का स्तर एक जैसा नहीं होगा’
पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी लुधियाना के विशेषज्ञ डॉक्टर जेएस माहल कहते हैं कि इस बारिश से नुकसान तो हुआ है, हालांकि इसका अनुमान लगाना अभी संभव नहीं है। जहां धान की फसल खेत में बिछ गई अब उसे मशीन से कैसे काटा जाएगा। अगर मशीन से कटाई होगी तो झाड़ पर सीधा असर होगा।
अगर बिछी फसल पानी में समा गई तो धान के दाने पर इसका असर जरूर देखने को मिल सकता है। चावल की क्वालिटी पर इसका असर होगा। जो धान कटाई के बाद अनाज मंडियों में पड़ा था, उसके भीगने पर भी नुकसान तो उतना ही होगा क्योंकि चाहे धान को सुखा लिया जाए लेकिन रंग में बदलाव जरूर आ जाता है। ऐसे धान का दाम कम होना स्वाभाविक है।