गिद्दड़बाहा (मुक्तसर)। एसोसिएशन ऑफ साइंटिफिक रिसर्च इन होम्योपैथी पंजाब और सहगल स्कूल ऑफ रिव्यू ओलाइंज्ड होम्योपैथी दिल्ली की ओर से मंडी वाली धर्मशाला में शनिवार से दो दिवसीय होम्योपैथी सेमिनार शुरू हो गया है। सेमिनार के प्रथम दिन वक्ताओं ने डॉक्टरों को प्रैक्टिस करने और अपने तर्जुबे के आधार पर मरीज के इलाज की विधि सिखाई।
संस्था के प्रवक्ता डॉ. एएस मान ने बताया कि होम्योपैथी के जन्म दाता मार्डन मेडिकल साइंस में एमडी डॉ. क्रिश्चन फरैड्रिक सैमीओल हैनीमैन ने प्रैक्टिस दौरान महसूस किया कि मौजूदा सिस्टम से बीमारी को सिर्फ दबा कर रखा जा सकता है। पक्के तौर पर ठीक नही किया जा सकता।
वह इस तलाश में थे कि कोई ऐसा तरीका तलाश किया जाए जो कुदरती नियमों पर आधारित हो। इसी सोच के चलते होम्योपैथी होंद में आई। होम्योपैथी में दवा का चुनाव मरीज की बीमारी के बजाए उसके लक्षणों से मेल खाता है। इस अवसर पर पर डॉ. भूपिंदर सिंह, मिशन होम्योपैथिक अस्पताल व रिसर्च सेंटर के डॉ. अमृतपाल सिंह, डॉ. अवतार सिंह, डॉ. प्रदीप बरनाला, डॉ. रविदंर सिंह धूरी आदि उपस्थित थे।