यूनियन के जनरल सचिव सुखदेव सिंह ने कहा कि किसानों के प्रदर्शन को और तेज करने के लिए पंजाब की समूह संघर्षशील जत्थेबंदियों के साथ विचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि किसानों ने सिर्फ निजी थर्मल प्लांट को जाने वाली पटरियों पर धरना लगाया है। अन्य किसी भी ट्रैक पर किसानों का धरना नहीं है, जिससे मालगाड़ियों के आने जाने में कोई रुकावट पैदा हो।
बैठक में मांग की गई कि निजी कंपनियों के थर्मल प्लांट को सरकारी कर कर्मचारियों को पूरे वेतन पर पक्का किया जाए। निजी थर्मल प्लांटों को जाने वाले कोयले को सरकारी थर्मलों में भेजकर चलाया जाए और बठिंडा में बंद थर्मल को भी फिर से शुरू किया जाए।
किसान नेताओं ने कहा कि पांच नवंबर को देशव्यापी चक्का जाम किया जाएगा और भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां की ओर से चार घंटे के लिए पंजाब को देश से जोड़ने वाले 23 नेशनल हाईवे पर जाम लगाया।
कोयले की कमी के चलते रोपड़ के गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल प्लांट की सभी यूनिट बंद कर दी गई हैं। रोपड़ थर्मल प्लांट में 210 मेगावाट की छह यूनिट हैं। इनमें से दो यूनिट पहले ही पूरी तरह बंद की जा चुकी हैं और अब कोयले की कमी बताते हुए बाकी चार यूनिट भी बंद कर दी गई हैं।
रोपड़ थर्मल प्लांट को मांग आने पर ही चलाया जाता है। धान के सीजन में प्लांट के चारों यूनिटों से बिजली उत्पादन किया गया था। इसकी पुष्टि थर्मल प्लांट के चीफ इंजीनियर दविंदर कुमार ने की है।
वहीं थर्मल प्लांट मुलाजिम यूनियन के प्रधान कंवलजीत सिंह का दावा है कि थर्मल प्लांट में 10 दिन से भी ज्यादा का कोयला पड़ा है। सरकार और मैनेजमेंट किसान आंदोलन को बदनाम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि रोपड़ थर्मल प्लांट में 45 दिन का कोयला स्टोर किया जा सकता है लेकिन सरकार द्वारा पिछले तीन साल से कोयले की स्टोरेज पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान तो अब आंदोलन कर रहे हैं लेकिन पिछले समय में भी सरकार और मैनेजमेंट ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
रेल ट्रैक पर धरना दे रहे किसानों के साथ बातचीत करने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से गठित तीन सदस्यीय मंत्रियों की टीम ने शुक्रवार को सर्किट हाउस में किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के सदस्यों के साथ बैठक की। शुरुआती दौर में बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला।
बैठक में मंत्री सुखबिंदर सिंह सरकारिया, सुखजिंदर सिंह रंधावा व तृप्त रजिंदर सिंह बाजवा मौजूद। किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के तरफ से सरवन सिंह पंधेर, गुरचरण सिंह चबा, सविंदर सिंह चुताला, हरप्रीत सिंह सिंध जसबीर सिंह व सुखविंदर सभरा ने हिस्सा लिया। समाचार लिखने तक बैठक चल रही थी।
मंत्रियों ने किसानों नेताओं से रेल ट्रैक खाली करने के लिए आग्रह किया, ताकि जरूरी वस्तुओं की कमी न हो। किसान नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि धरना तब तक जारी रहेगा, जब तक केंद्र सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती। पंधेर ने मंत्रियों से कहा की जो विधेयक पंजाब विधानसभा में पारित किए गए है, वह किसानों के साथ धोखा है।