-हाईकोर्ट में चुनौती, पुराने नियमों के तहत अवैध निर्माण नहीं होंगे नियमित
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संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। पंजाब सरकार द्वारा 15 दिसंबर 2025 को जारी किए गए पंजाब यूनिफाइड बिल्डिंग नियम 2025 को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। कोर्ट ने विवादित प्रावधानों पर फिलहाल रोक लगा दी है। 93 वर्षीय हरविंदर सेखों और 61 वर्षीय जसविंदर कौर ने नए नियमों को लागू करने के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की। केस एडवोकेट सहबाज थिंद और सुल्तान सिंह ने दायर किया, जबकि बहस सीनियर एडवोकेट आरएस बैंस ने कोर्ट में की।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नए नियम पहले से लागू कानूनों और नियमों के खिलाफ हैं, जैसे पंजाब फायर प्रिवेंशन एंड फायर सेफ्टी एक्ट, 2004 और नेशनल बिल्डिंग कोड ऑफ इंडिया, 2016। आरोप है कि नियम रियल एस्टेट एडवाइजरी कमेटी की सिफारिशों पर तैयार किए गए, जिसमें ज्यादातर निजी बिल्डर, कॉलोनाइजर और प्रमोटर शामिल हैं, और आम जनता के हितों की अनदेखी की गई।
याचिका में दावा- भीड़भाड़ और अव्यवस्था बढ़ेगी
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि नए नियमों के तहत 40 फीट चौड़ी सड़कों पर चार मंजिला रिहायशी इमारतें बन सकती हैं। कोर एरिया में व्यावसायिक इमारतों के लिए 100 प्रतिशत ग्राउंड कवरेज और 60 फीट या उससे अधिक चौड़ी सड़कों से सटे प्लॉट्स पर निर्माण की अनुमति दी गई है। इससे शहरों में भीड़भाड़ और अव्यवस्था बढ़ेगी। हाईकोर्ट ने 13 मार्च 2026 के लिए नोटिस ऑफ मोशन जारी किया। न्यायाधीश गुरविंदर सिंह गिल और प्रमोद गोयल की खंडपीठ ने आदेश दिया कि 15 दिसंबर 2025 की अधिसूचना के वे प्रावधान, जो पुराने नियमों और कानूनों से मेल नहीं खाते, फिलहाल लागू नहीं होंगे। साथ ही, पुराने नियमों के तहत जो निर्माण अवैध माने जाते थे, उन्हें रेगुलराइज नहीं किया जाएगा।