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Ludhiana News: अकाली दल पुनर्गठन में खामोशी, नेतृत्व से हो रहा मोहभंग

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पंकज शर्मा
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अमृतसर। शिरोमणि अकाली दल (बादल) से अलग होकर स्थापित किए गए अकाली दल पुनर्गठन में स्थिति अब चिंताजनक होती जा रही है। जहां एक ओर पार्टी के पुनर्गठन को लेकर शुरुआत में उम्मीदें थी, वहीं अब पार्टी के भीतर असंतोष और भितरघात के संकेत उभरने लगे हैं। खासकर माझा क्षेत्र में पार्टी की स्थिति संकटग्रस्त नजर आ रही है।
दो दिसंबर 2024 को अकाल तख्त साहिब की ओर से जारी आदेशों के बाद अकाली दल पुनर्गठन को लेकर नई उम्मीदें बनीं, लेकिन अब यह उम्मीदें धराशायी होती नजर आ रही हैं। पार्टी के पुनर्गठन के लिए गठित की गई टीम और भर्ती कमेटी के सदस्य खुद ही मौजूदा नेतृत्व के खिलाफ हो गए हैं। पहले मनप्रीत सिंह अयाली ने बगावती तेवर अपनाए और अब अमृतसर से वरिष्ठ नेता जसबीर सिंह घुम्मन ने पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
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जसबीर सिंह घुम्मन ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को एक सख्त पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने पार्टी की विचारधारा और सिद्धांतों की उपेक्षा की बात कही है। उनका कहना है कि अकाली दल के पुनर्गठन के उद्देश्य को पार्टी ने अब तक कागजों तक ही सीमित रखा है और उसे जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए हैं। घुम्मन के अनुसार अगस्त 2025 के बाद से पार्टी की गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं जिससे कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का मनोबल गिरा है।
माझा क्षेत्र की स्थिति
माझा क्षेत्र में स्थिति और भी गंभीर है। घुम्मन का कहना है कि कई प्रभावशाली और अनुभवी नेता पार्टी की उपेक्षा से निराश होकर घर बैठ गए हैं। जो कार्यकर्ता कभी अकाली दल की रीढ़ हुआ करते थे, अब वे खुद को राजनीतिक रूप से अकेला महसूस कर रहे हैं। संगठन में जिस तरह की सक्रियता और जनसंपर्क की आवश्यकता थी वह पूरी तरह से नदारद है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अकाली दल पुनर्गठित इस समय केवल बाहरी चुनौतियों से ही नहीं बल्कि आंतरिक नेतृत्व संकट और अविश्वास से भी जूझ रहा है। अगर पार्टी ने समय रहते अपने भीतर उठ रही आवाज को गंभीरता से नहीं लिया और फैसलों को जमीन पर नहीं उतारा तो इसका नकारात्मक प्रभाव 2027 के विधानसभा चुनावों में दिखाई दे सकता है।
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आंतरिक असंतोष और नेतृत्व संकट
अकाली दल पुनर्गठन की स्थिति में यह स्पष्ट हो रहा है कि पार्टी को अब अपनी आंतरिक असंतोष और नेतृत्व संकट से जूझते हुए अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं का विश्वास फिर से जीतने की आवश्यकता है। अन्यथा, पार्टी का भविष्य अंधेरे में पड़ सकता है।
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