कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के 1984 के सिख दंगों पर दिए गए बयान से गुस्साए दंगा पीड़ितों ने रविवार को कांग्रेस दफ्तर पर हमला बोल दिया।
प्रदर्शनकारी हाथ में डंडे और तलवारें लिए कांग्रेस दफ्तर पहुंचे लेकिन दफ्तर में ताला लगा होने के कारण लोगों ने दफ्तर के बाहर लगे सभी बोर्ड फाड़ दिए। वहां मौजूद पुलिस मुलाजिमों ने किसी तरह प्रदर्शनकारियों को रोक कर गली से बाहर किया तो लोगों ने घंटाघर की मेन सड़क को जाम कर दिया। इससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पीड़ितों ने राहुल गांधी, सोनिया गांधी, जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार की फोटो लगा एक पुतला भी जलाया।
जाम की सूचना मिलने पर थाना कोतवाली के एसएचओ सुरिंदर मोहन पुलिस पार्टी के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझाबुझाकर जाम खुलवाया। 1984 सिख कत्लेआम पीड़ित वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान सुरजीत सिंह ने कहा कि राहुल गांधी ने माना है कि दंगों में कुछ कांग्रेसियों का हाथ है। लेकिन बावजूद इसके उन कांग्रेसियों पर कार्रवाई नहीं हो रही।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच कराई जाए और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जो कांग्रेसी दंगों में शामिल थे, पार्टी उन्हें तुरंत बाहर करे और उन पर कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि अगर एक सप्ताह में इस मामले में कोई एसआईटी न बनी तो दंगा पीड़ित राहुल गांधी के घर के बाहर मरणव्रत पर बैठेंगे। इस मौके पर इंदर पाल सिंह विक्की, सतनाम सिंह, दलजीत शेंकी, अमरजीत सिंह, अमरीक सिंह, मनमोहन सिंह, बीबी हरबंस कौर, जगजीत सिंह और गुरचरण सिंह मौजूद थे।
कांग्रेस ने की दफ्तर पर हमले की निंदा
जिला कांग्रेस ने अज्ञात व्यक्तियों द्वारा रविवार को पार्टी कार्यालय में किए हमले की निंदा की है। एक बयान जारी कर जिला कांग्रेस कमेटी शहरी के प्रधान पवन दीवान, पूर्व मंत्री राकेश पांडे और पार्टी नेता परमिंदर मेहता ने अज्ञात व्यक्तियों द्वारा किए गए हमले के दौरान पुलिस द्वारा अपनाए गए उदासीन रवैये की आलोचना की है।
उन्होंने कहा कि यह एक रिहायशी इलाका है और इस हमले की घटना में स्थानीय निवासियों से भय का माहौल बन गया है। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि रविवार की छुट्टी थी वरना यह लोग यहां काम करने वालों के साथ मारपीट भी कर सकते थे और कोई बड़ी घटना घट सकती थी।