-कपड़ा उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित,
संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। अमेरिका की ओर से भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने का फैसला निर्यातकों और उन पर निर्भर लाखों श्रमिकों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। पंजाब का वस्त्र उद्योग जो पहले ही बढ़ती लागत और वैश्विक दबाव से जूझ रहा है, इस कदम से गहरे संकट में फंस सकता है। पंजाब टेक्सटाइल मर्चेंट्स एसोसिएशन के महासचिव सोनू निलीबार ने कहा है कि भारत ने हमेशा व्यापारिक रिश्ते भरोसे और विश्वसनीयता पर खड़े किए हैं। ऊर्जा खरीद के आधार पर भारत को दंडित करना न केवल अनुचित है बल्कि दूरदर्शिता के खिलाफ भी है। कई देश समान नीतियां अपना रहे हैं, लेकिन उन पर कोई सख्ती नहीं हुई। व्यापार को राजनीतिक हथियार बनाना रिश्तों में अविश्वास ही बढ़ाएगा।
उभरती अर्थव्यवस्थाएं तलाशेंगी नए रास्ते
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस टैरिफ न केवल भारतीय निर्यात प्रभावित होगा बल्कि अमेरिकी निवेशकों का भरोसा भी कमजोर पड़ सकता है। भारत और ब्राजील जैसे उभरते देश पहले से ही साझेदारियों का विविधीकरण कर रहे हैं। अब इसमें और तेजी आने की संभावना है। यदि उभरती अर्थव्यवस्थाएं अमेरिकी बाजार से दूरी बनाने लगें तो इससे अमेरिका की वैश्विक पकड़ भी ढीली हो सकती है।
सरकार से हस्तक्षेप की अपील
सोनू निलीबार ने कहा कि साझेदारी हमेशा संतुलन और सम्मान पर आधारित रहती है। अत्यधिक शुल्क के जरिये व्यापार को नियंत्रित करने की कोशिश मित्र देशों को भी अनिच्छुक साझेदार बना सकती है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाए, ताकि पंजाब समेत देशभर के लाखों श्रमिकों की रोज़ी-रोटी सुरक्षित रह सके।
लंदन जा रहे गारमेंट्स निर्यातक
हाल ही में हुए भारत और यूके के बीच व्यापार मुक्त समझौते-एफटीए के बाद देश के वुलेन गारमेंट्स निर्यातकों ने इंग्लैंड में संभावनाएं तलाशने के लिए होमवर्क शुरू कर दिया है। इसी क्रम में वूल एंड वूलेंस एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल-डब्ल्यूडब्ल्यूईपीसी के बैनर तले चालीस वूलेन गारमेंट्स निर्यातक एक और दो सितंबर को लंदन का दौरा करेंगे।