पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा।
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पूर्व वित्त मंत्री व लहरागागा से विधायक परमिंदर सिंह ढींढसा ने कहा कि स्पीकर ने उन्हें विधानसभा सेशन में भाग लेने की अनुमति दी होती तो वह खेती अध्यादेश के मुद्दे पर वोटिंग करवाने की मांग उठाते। इस गंभीर मुद्दे पर कम से कम सभी सियासी दलों की सोच तो सार्वजनिक होनी चाहिए। अकाली दल बादल का खेती अध्यादेश पर दोहरा मापदंड है।
अमर उजाला से फोन पर बातचीत में ढींढसा ने कहा कि उनकी पत्नी गगनदीप कौर ढींढसा के कोरोना पॉजिटिव आने के चलते स्पीकर राणा केपी सिंह ने सत्र में भाग लेने से मना कर दिया। एक दिन पहले ही चंडीगढ़ के एमएलए होस्टल में उनकी पत्नी का सैंपल लिया गया था। खुद उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई थी। फिर भी दस दिन के लिए घर में एकांतवास में हैं। उन्होंने स्पीकर से आग्रह किया था कि जब सभी विधायक दुरुस्त हो जाएं तब विधानसभा सत्र हो, लेकिन उन्होंने स्वीकार नहीं किया। ढींढसा ने कहा कि सेशन से पहले स्पीकर से इस मुद्दे पर बहस करवाने की मांग भी की थी। इसके बाद कांग्रेस ने इस अध्यादेश को विधानसभा में रद्द कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया अकाली दल ने तो इस मुद्दे पर दोहरा मापदंड अपनाया है, इसी कारण लोगों को भरोसा टूट गया है। अकाली दल इस अध्यादेश को किसान हित में बता रहा है तो सेशन में उन्हें अपनी सोच स्पष्ट करनी चाहिए थी। ढींढसा ने दोहराया कि इन अध्यादेशों के लागू होने से पंजाब की खेती और खेती आधारभूत ढांच तबाह हो जाएगा। पंजाब की पहले से विकसित मंडीकरण व्यवस्था को यह अध्यादेश बर्बाद कर देगा। इसका विरोध जारी रहेगा। सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने भी राज्यसभा में इस अध्यादेश का विरोध किया है और इसे पंजाब के किसानों का विरोधी बताया है।
फोटो: 29एसजीआरपी01: पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा।