मुल्लांपुर (लुधियाना) से तलवंडी भाई (फिरोजपुर) तक 78 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय मार्ग को फोरलेन बनाया जा रहा है। लेकिन दो कंपनियों के आपसी झगड़े के कारण निर्माण कार्य सात महीने से ठप पड़ा है।
दोनों कंपनियों का यह झगड़ा अब लुधियाना की कोर्ट में चला गया है और अदालत के फैसले तक प्रोजेक्ट लोगों के लिए मुसीबत बन गया है।
जानकारी के अनुसार नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचआई) ने 28 फरवरी 2011 को मुंबई की ऐसल नामक कंपनी को लुधियाना - फिरोजपुर राष्ट्रीय मार्ग के 78 किलोमीटर लंबे फोनलेन निर्माण प्रोजेक्ट के लिए 730 करोड़ रुपये का ठेका दिया था।
कंपनी ने इस प्रोजेक्ट का काम आगे पैन इंडिया नामक कंपनी को 652 करोड़ रुपये में सौंप दिया। इस के बाद कंपनी पैन इंडिया ने भी वराह इंफ्रक्चर लिमिटेड को 550 करोड़ में दे दिया। वराह कंपनी ने कस्बा अजीतवाल नजदीक निर्माण कार्य शुरू कर दिया। लेकिन इस निर्माण को लेकर कंपनियों के झगड़े के कारण पूरा काम ठप्प पड़ा गया और निर्माण करवा रही कंपनी ने अपनी मशीनरी तक उठा ली हैं।
कार्य के दौरान सड़क के दोनों तरफ की ओर पेड़ काटने और गड्ढों की वजह से आए दिन सड़क हादसे हो रहे है। इस वजह से लोग काफी परेशानी का सामना कर रहे हैं।
वहीं, वराह इंफ्रक्चर कंपनी के सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर जतिंदर सिंह ने दावा किया कि कंपनी ने तकरीबन 52 प्रतिशत कार्य मई 2013 में ही पूरा कर दिया था।
उन्होंने कहा कि कंपनी के इस कार्य के लिए उन्हें सरकार ने कंपनी को सर्टिफिकेट भी दिया था। सीनियर मैनेजर ने आरोप लगाया कि 275 करोड़ का काम पूरा कर दिया गया, जिसके लिए उनको मात्र 233 करोड़ रुपये ही मिले हैं। उन्होंने कहा कि जब उनकी कंपनी ने बाकी राशि मांगी, तो उनको ठेका देने वाली कंपनी उन्हें यह पूरा प्रोजेक्ट 350 करोड़ में पूरा करने पर जोर देने लगी। इसके बाद कंपनी ने काम रोक दिया और इंसाफ के लिए अदालत में केस कर दिया।
इस संबंध में ऐसल कंपनी के जनरल मैनेजर विपन ने आरोप लगाया कि वराह कंपनी लिमिटेड ने पुलिस की मिली भगत सेमशीनरी उठा ली है। कंपनी ने काम से अधिक पेमेंट और मुलाजिमों समेत अन्य का 40 करोड़ रुपये भी ले चुकी है। उन्होंने वराह कंपनी को पंजाब सरकार की ओर से अन्य प्रोजेक्ट मिलने के बाद कार्य न करने का बहाना लगाने का आरोप लगाया। अदालत में उनकी कंपनी के खिलाफ केस दायर कर दिया है।