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पंजाबी छात्रों के लिए राहत: ब्रिटेन के 22 विश्वविद्यालयों ने घटाई फीस, आर्थिक दबाव और घटती संख्या कारण

Mon, 07 Sep 2026 09:07 AM IST
Nivedita कंवरपाल, संवाद, हलवारा

सार

अंतरराष्ट्रीय मास्टर छात्रों की औसत ट्यूशन फीस करीब 15,000 से 45,000 पाउंड प्रतिवर्ष होती है। ऐसे में यह छूट विद्यार्थियों और उनके परिवारों के बजट पर बड़ा असर डाल सकती है। खासकर पंजाब के उन परिवारों के लिए जिनकी आय रुपये में है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Magnific (अमर उजाला ग्राफिक्स)
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विस्तार
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ब्रिटेन में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की तैयारी कर रहे पंजाब के छात्रों के लिए राहत की खबर है। आर्थिक दबाव और विदेशी छात्रों की घटती संख्या के कारण ब्रिटेन के कई विश्वविद्यालय अब अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों को आकर्षित करने के लिए ट्यूशन फीस में हजारों पाउंड की सीधी छूट दे रहे हैं। 

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22 विश्वविद्यालयों ने स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में स्वचालित फीस छूट की व्यवस्था शुरू की है। इसके लिए छात्रों को अलग से आवेदन या प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की जरूरत नहीं होगी।

एबरडीन विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय छात्रों को 8,000 पाउंड तक की सीधी ट्यूशन फीस में छूट दे रहा है। केंट विश्वविद्यालय भारत, चीन, दक्षिण कोरिया और वियतनाम सहित 14 देशों के छात्रों को मास्टर कार्यक्रमों में 5,000 पाउंड तक की छूट दे रहा है। नॉटिंघम विश्वविद्यालय भारत सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए 3,000 पाउंड की फीस छूट उपलब्ध करा रहा है। 
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अंतरराष्ट्रीय मास्टर छात्रों की औसत ट्यूशन फीस करीब 15,000 से 45,000 पाउंड प्रतिवर्ष होती है। ऐसे में यह छूट विद्यार्थियों और उनके परिवारों के बजट पर बड़ा असर डाल सकती है। खासकर पंजाब के उन परिवारों के लिए जिनकी आय रुपये में है।

सख्त वीजा नियमों का असर
ब्रिटेन में विदेशी छात्रों के लिए सख्त किए गए वीजा नियमों का असर दिख रहा है। अगस्त में छात्र आश्रितों से जुड़े आवेदन 19,200 रहे। यह पिछले वर्ष की तुलना में छह फीसदी कम है। दिसंबर 2023 में प्रतिबंध लागू होने से पहले की तुलना में यह संख्या करीब 87 फीसदी कम है। अगस्त 2026 में प्रायोजित अध्ययन वीजा के लिए आवेदन 11 फीसदी घटकर 3,81,500 रह गए। इन नियमों ने विदेशी छात्रों की संख्या में कमी की है।

विश्वविद्यालयों पर वित्तीय दबाव
विदेशी छात्र ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों के लिए महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत हैं। वे घरेलू विद्यार्थियों की तुलना में काफी अधिक फीस देते हैं। 2025-26 शैक्षणिक वर्ष में स्नातकोत्तर छात्रों से मिलने वाला ट्यूशन फीस राजस्व करीब पांच अरब पाउंड रहा। यह पिछले वर्ष की तुलना में 500 मिलियन पाउंड कम है। 2025-26 वित्तीय वर्ष में 124 शिक्षण संस्थान, यानी करीब 45 फीसदी संस्थान, बजट घाटे का सामना कर रहे हैं। विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति बिगड़ने पर सरकार के पास निपटने की स्पष्ट प्रक्रिया नहीं है।

कॅरिअर पर ध्यान दें विद्यार्थी
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती फीस प्रतिस्पर्धा शिक्षा की गुणवत्ता, शोध और रोजगार परिणामों के बजाय केवल कीमत पर केंद्रित हो सकती है। कुछ विश्वविद्यालय दाखिले के लिए ग्रेड आवश्यकताओं में भी नरमी ला रहे हैं। पंजाब के विद्यार्थियों को पढ़ाई का फैसला करते समय फीस के साथ विश्वविद्यालय की रैंकिंग, पाठ्यक्रम की गुणवत्ता और रोजगार की संभावनाएं देखनी चाहिए। वीजा नियम, रहने का खर्च और संस्थान की वित्तीय स्थिरता भी महत्वपूर्ण है। 8,000 पाउंड तक की छूट आकर्षक है, पर विदेश में उच्च शिक्षा लाखों रुपये का निवेश है। असली सवाल कॅरिअर को मिलने वाले फायदे का होना चाहिए।
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