वीरवार देर रात चली आंधी और तेज बारिश ने एशिया की सबसे बड़ी मंडी खन्ना में पड़ी गेहूं की फसल को बर्बाद कर दिया। तेज बारिश और आंधी के कारण मार्केट कमेटी खन्ना की पोल खुल गई। मार्केट कमेटी बड़े-बड़े दावे कर रही थी कि उनके पास फसल को रखने के लिए पुख्ता इंतजाम हैं, लेकिन देर रात हुई बारिश से मार्केट कमेटी खन्ना के दावे गलत साबित हुए, जिससे मंडी में जमीन पर और बोरियों में पड़ी गेहूं की फसल भीग गई।
वहीं मंडी में बैठे किसान हरजीत सिंह, उपेंद्र सिंह, कमलजीत सिंह, गजेंद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने पहले ही सरकार से अपील की थी कि जल्द से जल्द मंडी में लिफ्टिंग तेज की जाए, नहीं तो बहुत ज्यादा नुकसान हो जाएगा। इसके बावजूद उन्होंने कुछ नहीं किया। आज वही बात हो गई, तेज बारिश ने मेहनत पर पानी फेर दिया। यह तो चिंता का विषय है। जब मंडी में फसल लेकर आए थे, तब भी उतारने और सफाई करने की लेबर दी थी और अब फसल को पंखा लगाकर सुखाने का खर्च भी जेब से करना पड़ेगा। इस बर्बादी का जिम्मेदार कौन होगा। उनका कहना है कि हम तो अपनी फसल सुखाकर मंडी में लाए थे। सरकार या प्रशासन इसकी जिम्मेदारी नहीं लेंगे, लेकिन किसानों की मेहनत पर तो पानी फिर गया। इस संबंध में जब मार्केट कमेटी खन्ना के सचिव सुरजीत सिंह से बात की तो उनका कहना है कि कुछ नहीं हुआ है, सब ठीक है, हमारे पुख्ता इंतजाम हैं, थोड़ा बहुत ही नुकसान हुआ हैै।
मंडी से लिफ्टिंग न होने पर हुए नुकसान पर जब फूड सप्लाई अधिकारी हरभजन सिंह से बात की गई तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि एक भी गेहूं से भरी बोरी का नुकसान नहीं हुआ है, मंडी में जो फड़ों पर फसल पड़ी है, उसकी जिम्मेदारी आढ़ती की होती है, उनकी नहीं। खरीदी गई एक भी बोरी खराब नहीं हुई है, अगर कोई कहता है तो वह हमारे पास आ जाए। वहीं खन्ना मंडी में पड़ी गेहूं की सैकड़ों बोरियों की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि वे वहां पहुंचकर हालात का जायजा लेंगे।