सात दिन से मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के पैतृक हलका लंबी में मांगों को लेकर संघर्षरत नेशनल रुरल हेल्थ मिशन के तहत कार्यरत नर्सें वीरवार को वाटर-वर्क्स की टंकी पर चढ़ गईं।
वहीं दूसरी तरफ नर्सों ने राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर धरना देकर जाम लगा डाला जिससे वीरवार को लंबी में स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। टंकी पर चढ़ी नर्सों में सात तो पेट्रोल की बोतलें लेकर ऊपर जा पहुंची। अन्य नर्सों ने टंकी की सीढ़ियों पर बैठकर रास्ता रोक लिया और सरकार के खिलाफ खूब भड़ास निकाली।
टंकी पर चढ़ने वाली प्रदर्शनकारी नर्सें आत्मदाह की चेतावनी दे रही थीं जबकि अन्य नर्सों ने दिल्ली-फाजिल्का राष्ट्रीय राज्य मार्ग जाम कर दिया। धरने के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारी नर्सों में छह महीने से गर्भवती मोना रानी होशियारपुर की हालत शुगर घटने के कारण नाजुक हो गई और सड़क पर तड़पती रही। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों का प्रदर्शन जारी रहा।
मौके पर पहुंचे पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी नर्सों को समझा-बुझाकर मोना को अस्पताल ले जाने की बात करते रहे, मगर प्रदर्शनकारी टस से मस न हुए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक उन्हें रेगुलर करने का नोटिफिकेशन जारी नहीं हो जाता, तब संघर्ष जारी रहेगा। चाहे उनकी जान ही क्यों न चली जाए।
पुलिस कर्मी जबरन मोना को उठाकर अस्पताल ले जाने लगे तो अन्य नर्सें ऊपर लेट गईं और पुलिस से तकरार बढ़ गई। जिस पर पुलिस ने जबरन मोना को उठाकर लंबी के अस्पताल भिजवाया। जहां से उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे बठिंडा रेफर कर दिया गया।
इस दौरान हुई धक्कामुक्की में कई नर्सों के दुपट्टे सिरों से उतर कर गिर गए। इससे तैश में आईं नर्सों ने सरकार और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ समय बाद प्रदर्शनकारी नर्सों ने गांव बादल को कूच करने की कोशिश की, मगर भारी पुलिस दल ने अवरोधक कर उन्हें रोक लिया। जहां देर शाम तक धरना जारी रहा।
उधर, शरणजीत कौर, ममता, रेखा, हरजीत कौर, रीतू, दविंदर कौर सहित अन्य नर्सें पेट्रोल व माचिस सहित देर शाम तक टंकी पर चढ़ी रहीं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पिछले सात दिन से मरण व्रत पर बैठी जगदीप कौर की हालत नाजुक होती जा रही है। मगर सरकार उनकी एक नहीं सुन रही जिसके चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। खबर लिखे जाने तक देर शाम तक जहां एक तरफ नर्सें टंकी पर चढ़ी हुई थीं, तो दूसरी तरफ हाइवे पर धरना प्रदर्शन जारी था।