नगर निगम आधिकारियों से ठन जाने के बाद में कर्मचारियों ने निगम कमिश्नर के
अलावा ज्वाइंट कमिश्नर के दफ्तर आगे गंदगी के ढेर लगा दिए।
इस मौके निगम
अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। यह लड़ाई निगम इमारत में जगह की
कमी से शुरू हुई और नए आए सुपरिंटेंडेंट ने वाटर सप्लाई ब्रांच के क्लर्कों
से कमरा खाली करवा लिया।
इस मौके विपन हांडा ने अपने संबोधन में कहा
कि अधिकारियों ने निगम को कमाई का साधन बना रखा है। निगम के पास गाड़ियां
होने के बावजूद यहां तैनात एक अधिकारी ने अपने रिश्तेदार के नाम गलत ढंग से
निगम को गाड़ियां ठेके पर दे दीं।
इस मौके उन्होंने जेल में कैद काट कर आए
अधिकारी को पूरा वेतन देने का आरोप लगाते कहा कि इस अधिकारी को निलंबित भी
नहीं किया गया और सजा याफ्ता होने के नाते सरकार से कोई मंजूरी भी नहीं ली
गई।
इस मौके उन्होंने कहा कि निगम का दर्जा मिलने बाद सारा काम पुरानी
इमारत में ही चल रहा है। जगह की तंगी के कारण एक कमरे में ही सुपरिडेंट और
क्लर्क काम करने के लिए मजबूर हैं। नए आए सुपरिंटेंडेंट अमरदीप सिंह गिल
ने वाटर सप्लाई ब्रांच में से क्लर्कों की कुर्सियों उठवा कर कब्ज़ा कर
लिया।
उन्हाेंने कहा कि जब वाटर सप्लाई ब्रांच के क्लर्कों ने कमरा खाली
करवाने का विरोध किया तो कमिश्नर ने भी सुपरिंटेडेंट का बचाव करते हुए धमकी
दीं। इस के बाद में मामला बिगड़ गया और सभी कर्मी दफ्तरी कंमकाज ठप्प कर
हड़ताल पर चले गए।
इस मौके रवि सारवन, सतपाल चांवरिया, सेवक राम फौजी,
कुलवंत बोहत, सोमनाथ चम्बोड़, विक्की बोहत, इंद्रजीत सिंह गिल, सरबजीत
सिंह मान, प्रेम कुमार, हरप्रीत कौर, बेअंत कौर, परमजीत मालवा, राकेश
धुन्ना,अनिल चांवरिया, ओर अन्य कर्मी मौजूद थे।