विधायक जोगिंदर पाल जैन और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ अवैध कालोनी विकसित करने के विचाराधीन मामले में आखिरकार अदालत ने सुनवाई जारी रखते हुए मुकदमा रद्द करने से इंकार कर दिया।
शुक्रवार को जुडिशियल मजिस्ट्रेट सुमन अग्निहोत्री की अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी तय कर दी। अदालत गत 18 दिसंबर को विधायक जैन के बेटे पुनीत जैन को अदालत में पेश न होने पर उसे भगोड़ा करार दे चुकी है।
अदालत ने विधायक के वकीलों द्वारा यह मामला रद्द किए जाने के लिए पेश किए गए तर्कों को भी खारिज करते हुए साफ कर दिया कि जोगिंदर पाल जैन और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ अवैध कालोनी विकसित करने का मामला जारी रहेगा। इसके साथ ही अदालत ने जैन के वकील अनीशकांत शर्मा और शिव चरण सिंह गिल की ओर से विधायक पर मामला दर्ज करवाने के मामले में पुडा के अधिकारी को अदालत में बुलाने के लिए दायर अर्जी को भी खारिज कर दिया है।
थाना महिना में 26 अगस्त, 2007 को विधायक जोगिंदर पाल जैन, उनकी पत्नी स्वर्ण लता जैन (पूर्व प्रधान नगर काउंसिल), दोनों पुत्रों पुनीत जैन और अक्षित जैन के अलावा उनकी बेटी के खिलाफ अवैध कालोनी विकसित करने के आरोप में 26 अगस्त 2007 को केस दर्ज किया गया था। इसके बाद जैन की अर्जी पर यह केस मोगा की अदालत से फरीदकोट की अदालत में शिफ्ट कर दिया गया था।
केस की सुनवाई के दौरान 21 फरवरी, 2012 को विधायक जैन का पुत्र पुनीत जैन अदालत से आज्ञा लेकर कनाडा चले गए थे। लेकिन इसके बाद अदालत में पेश न होने पर फरीदकोट की अदालत ने 31 मई, 2013 को पुनीत जैन के गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए। इसके बाद विधायक जैन ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अरजी दाखिल कर केस को मोगा की अदालत में ट्रांसफर करने का आग्रह किया, जिसे हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया। लेकिन इसी दौरान पंजाब सरकार की ओर से राज्य में अवैध कालोनियों को नियमित किए जाने की नीति लागू किए जाने पर विधायक जैन ने अवैध रूप से विकसित की गई कालोनी को मंजूर कराने के लिए पुडा के पास कुछ रकम जमा करवा दी और अदालत में इस केस की सुनवाई रोकने के लिए अर्जी भी दाखिल कर दी।
इसी दौरान पुनीत जैन भी कनाडा से लौट आया, लेकिन अदालत की ओर से जेल भेजे जाने के डर कारण अदालत में पेश नहीं हुआ। इसे देखते हुए अदालत ने पुनीत जैन को भगोड़ा करार दे दिया है।