पश्चिमी विक्षोभ के कारण हो रही बारिश ने पंजाब के किसानों की नींद उड़ा दी है। उनका हर पल मौसम का हाल जानने और बादलों की चिंता में ही गुजर रहा है।
सूबे के खेतों में तकरीबन 135 लाख टन गेहूं की फसल पक चुकी है। बार-बार हो रही बारिश से सीधा नुकसान गेहूं की फसल को हो रहा है। इससे उत्पादन कम होने की संभावना है और गेहूं का दाना काला हो सकता है। वीरवार को भी लुधियाना जिले में दोपहर तक 3.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
सूबे में इस सीजन में मौसम का उतार-चढ़ाव लगातार बना हुआ है। इसने कृषि विशेषज्ञों और किसानों को चिंता में डाल दिया है। गेहूं का कटना शुरू हो चुका है और फसल का मंडी में आना भी शुरू हो गया है। हालांकि, मौसम में ठंडक के कारण इस बार गेहूं की कटाई 15 से 20 दिन की शुरू हुई है। इसके बावजूद जो भी गेहूं मंडी पहुंचा है, उस पर बारिश के कारण संकट छा गया है। मंडी में गेहूं लेकर पहुंचे किसान उसे तिरपाल डाल कर बारिश से बचा रहे हैं।
19 तक कटाई से बचें: पीएयू
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ क्लाइमेट चेंज की डायरेक्टर डॉ. एलके धालीवाल का कहना है कि 19 अप्रैल तक सूबे में तेज हवा चलने और बारिश की संभावना है। तब तक किसान गेहूं की कटाई से बचें। 19 तक सूबे में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रहने का अनुमान है।
मौसम से सहमे किसान : राजेवाल
भारतीय किसान यूनियन के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल कहते हैं कि बारिश ने पहले भी गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाया है। इसलिए सरकार ने गिरदावरी कराने के आदेश दिए थे। अभी भी मौसम साथ नहीं दे रहा है। इससे पंजाब का किसान डरा हुआ है। फसल खराब होने की सूरत में उसकी आर्थिक दशा और भी खराब हो जाएगी।