देश की सबसे हल्की बच्ची नैना को नव वर्ष पर डीएमसी प्रबंधन ने उसकी जुड़वां बहन के साथ माता-पिता को सौंप दिया।
हालांकि 12 दिसंबर को जन्मी दो जुड़वां बच्चियों को अभी कुछ दिन और अस्पताल में रहना होगा लेकिन अब सबसे हल्की बच्ची नैना की सेहत में लगातार सुधार हो रहा है। उसे बचाने के लिए डाक्टरों ने लगातार दिन रात एक किया है। इस उपलब्धि को डीएमसी के डाक्टरों की टीम ने नव वर्ष पर सेलिब्रेट किया।
बठिंडा निवासी भावना ने 12 दिसंबर को साढ़े छह माह के गर्भ में प्रि-मैच्योर डिलीवरी के तहत दो बच्चियों को जन्म दिया। जन्म के वक्त एक बच्ची इशान का वजन 780 ग्राम था और नैना का जन्म 480 ग्राम था, जोकि बाद में कम होकर 420 ग्राम तक भी रह गया। देश में अब तक सबसे हल्का बच्चा पूना में 495 ग्राम का पैदा हुआ था। नैना का वजन उसे कम था। उसके बचने की संभावनाएं केवल बीस फीसदी थीं, लेकिन डाक्टरों के लगातार प्रयास से अब नैना का वजन 1100 ग्राम और ईशान का वजन 1800 ग्राम हो गया है।
भावना के शादी के बाद आठ साल तक कोई बच्चा नहीं हुआ था। इसके बाद टेस्ट ट्यूब के जरिए गर्भधारण के बाद उसे काफी काफी दिक्कतें आईं। गर्भ में बच्चों को रक्त का प्रवाह कम हो रहा था इसलिए डाक्टरों ने साढ़े छह माह में ही प्रि मैच्योर डिलीवरी कराने का फैसला किया। जन्म के वक्त देश की सबसे हल्की बच्ची नैना अपने पिता के एक हाथ में आसानी से आ गई।
डीएमसी के डाक्टर कमल अरोड़ा ने कहा कि अब बच्चियों की हालत काफी बेहतर है। डाक्टर अरोड़ा ने कहा कि इतने हल्के बच्चे के बचने का देश में यह पहला मामला है। बच्चों को बचाने के लिए न्योनेटल आईसीयू में लगातार रखा गया। इस अवसर पर डीएमसी के कई डाक्टर मौजूद रहे।