डाबा रोड पर शनिवार दोपहर उस समय भगदड़ मच गई, जब वहां ओसवाल वूलेन मिल के गोदाम में आग लग गई। आग लगने से वहां पर पड़ा लाखों रुपये का कपड़ा, धागा और वेस्ट जल कर राख हो गए।
आग की लपटें दूर दूर तक दिखाई दे रही थीं। मिल के मुलाजिमों ने अपने फायर सिस्टम से आग पर काबू पाना शुरू किया। इसी दौरान मिल का सिक्योरिटी गार्ड जगजीत सिंह घायल हो गया। उसे एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया। जहां उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। लोगों ने आरोप लगाया कि सूचना मिलने के काफी समय बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ियां वहां पर पहुंचीं, लेकिन उनमें पानी कम था। इस वजह से आग पर काबू पाने में देरी हो गई। खबर लिखे जाने तक आग पर काबू नहीं पाया गया था।
चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर बलविंदर सिंह ने कहा कि गोदाम में कुछ तैयार माल, धागा और वेस्ट कपड़े पड़े हुए थे। दोपहर को चल रही तेज हवा से गोदाम के बाहर रोड पर लगे ट्रांसफार्मर से तार स्पार्क कर चिंगारी अंदर चली गई, जिससे वहां पर आग लग गई। देखते ही देखते आग ने भयंकर रूप धारण कर लिया। आग की लपटें देख गोदाम के सामने स्थित पेट्रोल पंप में भी भगदड़ मच गई। पंप मुलाजिमों ने तुरंत वहां की मशीनें बंद कर दीं, ताकि कोई अनहोनी न हो सके।
बलविंदर सिंह भी अन्य मुलाजिमों के साथ आग पर काबू पाने में जुट गए। उन्होंने आरोप लगाया कि फायर ब्रिगेड को तुरंत सूचित कर दिया गया था, लेकिन सूचना देने के बाद भी गाड़ियां एक घंटे बाद पहुंचीं। जब वह पहुंची तो उनकी गाड़ी में भी पानी कम था। एक एक कर फायर ब्रिगेड के तीस टैंकर इस्तेमाल किए गए। बलविंदर सिंह ने कहा कि अंदर कितना माल पड़ा था अभी तक कुछ नहीं कहा जा सकता।
वहां मौजूद लोगों ने कहा कि अगर मिल के पास अपने फायर सिस्टम नहीं होते तो आग पर काबू पाना मुश्किल हो सकता था और बड़ा हादसा हो सकता था। फायर अफसर जीत राम ने लोगों द्वारा लगाए आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि सूचना मिलने के करीब दस मिनट बाद ही फायर ब्रिगेड की गाड़ी वह खुद लेकर आए थे। फायर ब्रिगेड की पांच गाड़ियों ने तीस के करीब चक्कर लगा आग पर काबू पाने की कोशिश की है।