लंबे वक्त से अदालती चक्करों में फंसे लोग भी अब वक्त एवं पैसे की बचत के लिए अपने मामले आम सहमति से निपटाने को तरजीह देने लगे हैं।
न्यायिक एवं सिविल अदालतों में बड़ी संख्या में पड़े मामलों को तेज एवं सरल तरीके से निपटाने के लिए पूरे देश में राष्ट्रीय लोक अदालतों का आयोजन किया जा रहा है। यदि इन अदालतों को लोगों का पूर्ण सहयोग मिलता है तो ऐसी अदालतों का आयोजन हर साल किया जा सकता है। यह विचार पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायधीश एसके मित्तल ने शनिवार को लुधियाना में व्यक्त किए।
जस्टिस मित्तल जिला अदालत परिसर में लगी राष्ट्रीय लोक अदालत का जायजा लेने यहां पहुंचे थे। इन अदालतों में लोगों का उत्साह देख कर मित्तल नेे तसल्ली जताई।
लोक अदालतों के दौरान शनिवार को जिला एवं इसकी सब डिवीजन में कुल 60 हजार शिकायतें पहुंची थी। इनमें से 43 हजार का निपटारा आम सहमति से कर दिया गया। इनमें 1,01,78,00,718 रुपये की रकम के अवार्ड पास किए गए। इन अदालतों में दीवानी, वैवाहिक, किराया अपील, मोटर दुर्घटना क्लेम, जमीन कब्जे, आपराधिक अपील इत्यादि मामलों का निपटारा किया गया।
इससे पहले जस्टिस मित्तल का जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुरबिंदर सिंह ने अदालत परिसर में स्वागत किया। पंजाब पुलिस की टुकड़ी ने जस्टिस मित्तल को सलामी दी। इस अवसर पर डीसी रजत अग्रवाल, अतिरिक्त सत्र न्यायधीश एसके अरोड़ा एवं परमजीत सिंह, सीजेएम केके सिंगला, डीसीपी हर्ष बांसल समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।