मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने इस बार नरेंद्र मोदी के लाल किले पर झंडा फहराने की भविष्यवाणी करते हुए दावा किया कि लोकसभा चुनाव में इस बार कांग्रेस प्रधान सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी तक चुनाव हारेंगे।
बादल शुक्रवार को भाजपा के पीएम पद के दावेदार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की जगरांव में 23 फरवरी को हो रही फतेह रैली का जायजा लेने आए थे।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने रैली स्थल जगरांव चीनी मिल में ही सात जिलों के विधायकों, अकाली-भाजपा लीडरशिप और नेताओ की मीटिंग बुलाई थी। इसमें मुख्यमंत्री ने सभी को ड्यूटी बांटी। इस मौके पर उपस्थित एसजीपीसी के अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ को राज्य भर से सभी एसजीपीसी मेंबरों की अगुवाई में जनता को रैली में पहुंचाने की ड्यूटी लगाई।
उन्होंने पंजाब भाजपा के प्रधान कमल शर्मा को मंच से ही भाजपाइयों के रैलियों व अन्य समागमों में संख्या कम होने की शिकायत करते यह तक कह दिया कि भाजपाई काफी कम आते हैं। पार्टी से ज्यादा दुकानों पर ध्यान देते हैं, इसलिए इस बार रैली छुट्टी वाले दिन की रखी गई है, लेकिन वे ज्यादा से ज्यादा संख्या में आएं।
किसी भी हाल में बाजवा नहीं जीतेंगे : बादल
मीटिंग को संबोधित करते मुख्यमंत्री ने अपने 60-70 वर्ष के राजनीतिक एक्सपीरियंस का खास जिक्र करते हुए पार्टी के नेताओं को नसीहत दी कि जनता के साथ निचले स्तर तक तालमेल रखें।
बादल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने पंजाब का धार्मिक, आर्थिक और सामाजिक तौर पर जो नुकसान किया है, उसके दर्द पर कई किताबें तक लिखी जा सकती हैं। बादल ने कहा कि पंजाब प्रदेश कांग्रेस के प्रधान प्रताप सिंह बाजवा किसी भी हाल में चुनाव नहीं जीतेंगे, वे शर्त तक लगाने को तैयार हैं।
चुनाव आते ही कैप्टन होते हैं सक्रिय
पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की बयानबाजी पर टिप्पणी करते बादल ने कहा कि कोई भी चुनाव नजदीक आते हैं तो कैप्टन एकदम से प्रगट हो जाते हैं और उनके खिलाफ अनापशनाप बयान देकर अखबारों की सुर्खियां बटोरने में लग जाते हैं। पंजाब की जनता सब जानती है कि कैप्टन कुछ समय के लिए जागते हैं।
तंदुरुस्ती का राज बाजरा और चने
मीटिंग में मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और नेताओं की खूब क्लास लगाई, वहीं 86 वर्ष में भी अपनी तंदुरुस्ती का राज बाजरा और चने बताया। मुख्यमंत्री बोले कि आज रैलियों-मीटिंगों में एसी बसों और खाने को बढ़िया पकवानों का दौर चल पड़ा है, लेकिन उनके समय में तो बस पार्टी ही सबकुछ होती थी। उन्होंने नेताओं को रैली में ट्रकों, टेपो यहां तक कि नजदीक वाले वर्करों साथ साइकिलों पर आने की सलाह दी।