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बारिश ने ‘डुबोया’ लुधियाना में फलों का कारोबार

Wed, 22 Jan 2014 10:46 PM IST
अमर उजाला, लुधियाना
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सर्दी के  मौसम में फल मार्केट सामान्य तौर पर 20 से 25 फीसदी तक सुस्त रहती है, लेकिन पंजाब की आर्थिक राजधानी में मंगलवार की देर रात से हो रही बारिश में फल कारोबार लगभग ‘डूब’ सा गया है।
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बारिश के चलते शहर की फल मंडी में बुधवार को सत्तर फीसदी ग्राहक कम पहुंचे, अस्सी फीसदी रेहड़ी वालों ने अपनी रेहड़ियां नहीं लगाई। इसके अलावा माल की आमद भी 30 फीसदी तक कम हुई। बावजूद इसके  ग्राहकों के टोटे के कारण काफी मात्रा में फल बचे रह गए। मंडी में 25 हजार किलो किन्नू का स्टॉक बचा रह गया। इन परिस्थितियों में फल की कीमत भी मंगलवार के मुकाबले बुधवार को औंधे मुंह गिर गई। कारोबारियों का कहना है कि अब मौसम साफ होने के बाद ही मंडी में रौनक लौट सकती है।

इलाके में मंगलवार से ही आसमान पर बादल छा गए। मंगलवार को हल्की बूंदाबांदी के बाद देर रात से बारिश का दौर शुरू हो गया जो बुधवार को भी जारी रहा। शहर में बुधवार की सुबह साढ़े आठ बजे तक 18.30 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई। लिहाजा सुबह से ही बारिश का दौर चलने के कारण फल मंडी में सन्नाटा पसर गया। आढ़ती ग्राहकों के इंतजार में बैठे रहे, लेकिन मायूसी ही हाथ लगी।
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मंडी में चीकू की आमद नहीं हुई
बारिश के कारण मंडी में चीकू की आमद नहीं हुई। मंडी में एकदम से आई सुस्ती के कारण फलों की कीमतों में भी गिरावट देखी गई। मंगलवार को 16 रुपये प्रति किलो में बिकने वाले किन्नू की कीमत बुधवार को गिरकर 12 रुपये रह गई। पाइन एप्पल के  दाम एक दिन में 25 रुपये से गिरकर 18 रुपये रह गए। संतरे की कीमत 1000 रुपये प्रति 22 किलो पेटी से कम होकर आठ सौ रुपये रह गई। हरे अंगूर के दाम भी 50 रुपये से कम होकर 40 रुपये रह गए। काले अंगूर के दाम 70 रुपये से कम होकर 60 रुपये प्रति किलो पर रह गए।

बारिश ने चौपट किया फल का कारोबार
फ्रूट एंड वेजिटेबल कमीशन एजेंट्स एसोसिएशन ऑफ पंजाब के महासचिव अमरवीर सिंह का कहना है कि बारिश ने फल कारोबार को चौपट करके रख दिया है। इससे मांग में एकदम से कमी आई है। मंडी में किन्नू का काफी स्टॉक जमा हो गया है। इसके अलावा अन्य फलों का स्टॉक भी बढ़ रहा है। इससे कारोबारी को आर्थिक नुकसान होने का अंदेशा है। अमरवीर ने कहा कि बारिश के मौसम में रेहड़ी लगाने वाले भी तौबा कर रहे हैं, जबकि मंडी से काफी माल रेहड़ी वाले ही खरीद करते हैं। अब मौसम साफ होने पर ही फल कारोबार में फिर से बहार आ सकती है।
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