पनबस-पीआरटीसी कांट्रैक्ट वर्कर यूनियन अब सरकार से आर-पार की लड़ाई के मूड में आ चुकी है। शुक्रवार को पंजाब से सभी बस डिपो पर यूनियन ने दो घंटे तक चक्काजाम किया। इस दौरान किसी बस को डिपो से बाहर नहीं जाने दिया गया और न ही कोई बस अंदर आ सकी।
लुधियाना बस स्टैंड पर सुबह 10 बजे से दोहर 12 बजे तक पूरी तरह से चक्का जाम रखा। इस दौरान यूनियन नेताओं ने सरकार को चेतावनी देते साफ कहा कि अगर छह दिसंबर तक उनकी मांगों को हल नहीं किया जाता है तो सात दिसंबर से वह अनिश्चिलकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इसके बाद अन्य यूनियन के सहयोग से सरकार के खिलाफ संघर्ष होगा।
लुधियाना डिपो प्रधान सतनाम सिंह और पीआरटीसी प्रदेश नेता जगतार सिंह ने कहा कि बीते लंबे समय से परिवहन विभाग के कच्चे मुलाजिमों को पक्का नहीं किया जा रहा है। पहले पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भरोसा दिया, छह अक्तूबर 2021 को नए परिवहन मंत्री राजा वड़िंग ने भरोसा दिया फिर 12 अक्तूबर को नए सीएम चन्नी ने भरोसा दिया कि 20 दिन में सभी को पक्का किया जाएगा।
नए एक्ट के आने से यह साफ हो गया कि परिवहन विभाग का एक भी मुलाजिम पक्का नहीं होगा। 22 नवंबर को सरकार के साथ बैठक में उन्हें भरोसा दिया गया कि कैबिनेट की पहली बैठक में उनकी मांगों को पूरा कर दिया जाएगा। एक दिसंबर की कैबिनेट बैठक में ऐसा कुछ नहीं किया गया।
बैंक से कर्जा लेकर डाली जाती है बसें
यूनियन नेता शमशेर सिंह ढिल्लो ने बताया कि उनकी मांग है कि 10 हजार सरकारी बसें की जाए। सरकार के खजाने पर इसका कोई बोझ नहीं पड़ता है क्योंकि पनबस और पीआरटीसी बैंक से कर्ज लेकर बसों को डालते है। इन्हें चलाने वाले मुलाजिम अपनी मेहनत के साथ कर्ज उतारते है। इसका सरकारी खजाने से दूर का कोई संबंध नहीं है फिर भी सरकार अपनी पीठ थपथपाती है।
इस समय पंजाब रोडवेज की 2407 बसों का बेड़ा 399 तक सिमट चुका है। पंजाब की आबादी दो करोड़ तक पहुंच गई है। पंजाब सरकार फ्री सुविधा देने का लालीपाप दे रही है। इतनी बसों में क्या मुफ्त सुविधा आम लोगों को दे सकते हैं। इस मौके पर यूनियन नेता गुरविंदर सिंह, सुखविंदर सिंह, कैशियर जतिंदर सिंह, गुरजंट सिंह, रविंद सिंह सहित कई नेता मौजूद रहे।