बठिंडा में प्रदर्शन करते अध्यापक
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मॉडल आदर्श स्कूल कर्मचारी एसोसिएशन की ओर से मांगों के लिए रविवार को राज्य स्तर पर बठिंडा में धरना लगाया गया। साथ ही तीन घंटे तक मानसा-बठिंडा हाईवे जाम किया गया। इस दौरान एसोसिएशन के सैकड़ों कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने नायब तहसीलदार अवतार सिंह को सरकार के नाम एक मांग पत्र भी सौंपा। इसके बाद उक्त अध्यापकों व कर्मियों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अमृतपाल सिंह सिद्धू ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब सरकार की ओर से साल 2010 में 21 मॉडल और 6 सरकारी आदर्श स्कूल खोले थे। इसमें नियमों के तहत उन्हें भर्ती किया गया था। इन स्कूलों में ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है, लेकिन प्रदेश सरकार इन स्कूलों में अपनी सेवाएं निभा रहे कर्मियों के लिए कोई ठोस नीति नहीं बना रही।
उन्होंने बताया कि अध्यापकों को इन स्कूलों में रेगुलर स्केल में भर्ती किए गए थे, लेकिन सरकार ने उनके लिए भी कोई ठोस नीति नहीं अपनाई। कई अध्यापक सरकार की परेशानी के चलते नौकरी छोड़कर चले गए हैं। उन्होेंने बताया कि सरकार ने साल 2015 में उच्च स्तरीय कमेटी बनाकर इन कर्मियों को रेगुलर करने के लिए 2 माह में रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था, लेकिन उक्त रिपोर्ट अभी तक जनतक नहीं की गई।
उन्हाेंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि आदर्श स्कूल के इन अध्यापकों को शिक्षा विभाग के अधीन लाकर रेगुलर किया जाए। वहीं दी क्लास फोर गवर्नमेंट इंप्लाइज यूनियन पंजाब ने सरकारी मॉडल स्कूलों में दर्जा चार कर्मियों को रेगुलर करने की प्रदेश सरकार से मांग की है।
इस बारे में यूनियन के नेताओं ने बताया कि दर्जा चार कर्मी 24 घंटे काम करते हैं। इन स्कूलों में तीन ही कर्मचारी काम करते हैं। उन्होंने मांग की कि उक्त स्कूलों में खाली पड़े अतिरिक्त पदों को जल्द भरा जाए। ठेकेदारी सिस्टम बंद करके बीते कई सालों से काम कर रहे दर्जा चार कर्मियों को रेगुलर किया जाए।