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प्रदेश सरकार की नीतियों पर फूटा गुस्सा, नारेबाजी

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लुधियाना। आंगनबाड़ी एवं विभिन्न मजदूर यूनियनों ने शुक्रवार को जिला कांप्लेक्स के बाहर केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रोष जताया। सभी यूनियनों ने मांग की कि केंद्र सरकार कृषि कानूनों को तुरंत वापस ले ताकि पंजाब की किसानी को बचाया जा सके। प्रदेश सरकार भी केंद्र सरकार की नीतियों पर चल रही है। इसे किसी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा।
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आंगनबाड़ी मुलाजिम यूनियन सीटू जिला सुभाष रानी ने कहा कि पंजाब सरकार ने अक्तूबर 2018 में केंद्र सरकार की तरफ से बढ़ाए गए हेल्पर वर्कर के मान भत्ते से 40 फीसदी की कटौती कर दी है। एक तरफ सीएम न्यूनतम वेतन की बात कर रहे हैं तो दूसरी तरफ अपने हिस्से का 40 फीसदी पैसा वर्कर को दे नहीं रहे हैं। यही नहीं पंजाब सरकार ने प्री प्राइमरी क्लास को सरकारी स्कूलों में शिफ्ट कर आंगनबाड़ी की रौनक खत्म कर डाली है जबकि हिमाचल और राजस्थान में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस मौके पर आशा रानी, धीरज बाला, निर्मल कौर, अंजू मैहता, परमिंदर कौर, रजनी बाला सहित कई वर्कर मौजूद थे। वहीं डीसी कांप्लेक्स के बाहर 16 यूनियन ने धरना लगाकर सीएम को ज्ञापन भेजा। इसमें उन्होंने अपनी 12 मांगें उठाईं। धरने में जल सप्लाई एंड सैनिटाइजेशन कांट्रेक्ट यूनियन, पंजाब रोडवेज कांट्रेक्ट यूनियन, पीडब्ल्यूडी फील्ड वर्कशाप यूनियन, कारखाना मजदूर यूनियन, टेक्सटाइल होजरी कामगार यूनियन, लोक एकता संगठन के पदाधिकारी मौजूद थे।
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