पंजाब सरकार एक तरफ राज्य में एग्रो प्रोसेसिंग उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए टैक्स हॉलीडे समेत कई तरह की सुविधाएं दे रही है, वहीं दूसरी तरफ प्लाईवुड उद्योग को एग्रो प्रोसेसिंग की सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है। सरकार के इस सौतेले व्यवहार के कारण इंडस्ट्री घरेलू प्रतिस्पर्धा से आउट हो रही है। उद्यमियों का दावा है कि यदि सरकार प्लाईवुड उद्योग को लेवल प्लेइंग फील्ड दे तो उद्योग को टर्नओवर मौजूदा 1500 करोड़ से उछलकर 4500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, पंजाब देश का बड़ा प्लाईवुड हब बन सकता है। उद्यमी पंजाब से यूरोप, अमेरिका समेत विश्व के कई देशों में प्लाईवुड का निर्यात कर सकते हैं।
पंजाब प्लाईवुड मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान आरएस सोहल का तर्क है कि सरकार ने तीन साल पहले प्लाईवुड को एग्रो प्रोसेसिंग उद्योग की कैटेगरी में शामिल किया था, लेकिन उनको इस कैटेगरी की एक भी सुविधा नहीं दी जा रही है। हालत यह है कि इंडस्ट्री 12.50 फीसदी सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी समेत 32 फीसदी से अधिक टैक्स अदा कर रही है। अधिक करों के कारण हरियाणा और अन्य राज्यों से सस्ता माल पंजाब मार्केट में आ रहा है। यहां के उद्यमियों का माल महंगा साबित हो रहा है। ऐसे में उद्यमी बाजार की चुनौतियों का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं।
इंडस्ट्री में निगेटिव ग्रोथ का असर किसानों पर भी हो रहा है। दो साल पहले पापुलर की लकड़ी का दाम एक हजार रुपये क्विंटल था, अब वह कम होकर छह सौ रुपये रह गया है। इससे किसानों का भी नुकसान हो रहा है। सोहल ने कहा कि यदि सरकार इंडस्ट्री को करों में राहत दे और एग्रो प्रोसेसिंग की सुविधाएं दे तो यहां का प्लाईवुड पूरे विश्व में पहचान बना सकता है। इससे जहां रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, वहीं सरकार के राजस्व में भी इजाफा होगा।