दीपावली की खुशियों के बीच पटाखों का खास महत्व है। पटाखों के धूम धड़ाके के बीच सावधानी जरूरी है। डाक्टरों ने इस संबंध में लोगों को सलाह दी है कि पटाखों की चिंगारी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
पिछले साल सीएमसी अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी में दीपावली की रात आने वाले मरीजों में आठ से 16 साल की उम्र के लड़कों की संख्या ज्यादा रही।
इसके पीछे एक ही कारण रहा कि बच्चों ने बिना बड़ों की देखरेख में पटाखे चलाए और नुकसान करवा लिया। डाक्टरों का कहना है कि पटाखे चलाते वक्त कई तरह की सावधानियां रखना अनिवार्य है।
शरीर के विभिन्न अंगों के अलावा आंखों पर इसका गहरा असर पड़ता है। कई बार आंख की रोशनी तक खत्म हो जाती है।
सीएमसी के आंखों के विभाग के हैड डॉ. नितिन बतरा का कहना है कि पटाखे चलाते वक्त बच्चों का खास ध्यान दें। बच्चों को अपनी देखरेख में ही पटाखे चलाने दें। घर में बच्चे छोटे हों तो बम एवं आतिशबाजी की खरीददारी से परहेज करें।
पटाखों को स्टोर करते वक्त भी सावधानी रखना जरूरी है। पटाखे चलाते वक्त कॉटन के तंग कपड़े पहनें। आंखों पर चोट आने पर इसे कॉटन से कवर करके तुरंत अस्पताल में पहुंचे।