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Ludhiana: अजमेर-अमृतसर एक्सप्रेस में कपूरथला निवासी को आया हार्ट अटैक, महिला डॉक्टर ने सीपीआर देकर बचाई जान

Thu, 21 Nov 2024 02:47 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)

सार

कपूरथला निवासी स्वामी प्रसाद अपने परिवार सहित खाटू श्याम के दर्शन करके लौट रहे थे। चरखी दादरी के पास वे बाथरूम गए और वहीं गिर गए। ट्रेन में मौजूद महिला डॉक्टर ने उन्हें सीपीआर दिया और उनकी जान बचा ली।
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अस्पताल में भर्ती स्वामी प्रसाद - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अजमेर-अमृतसर एक्सप्रेस में सफर के दौरान एक यात्री को दिल का दौरा पड़ गया। इससे यात्री की हालत बिगड़ गई और उसकी सांस भी रूक गई। इतने में ट्रेन में मौजूद एक महिला डॉक्टर ने बिना किसी देरी के यात्री को तुरंत सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिसुसिटेशन) देना शुरू कर दिया। यात्री की सांसें थम चुकी थीं, लेकिन गर्दन और हाथ की नब्ज चल रही थी। 35 सेकेंड तक सीपीआर देने के बाद यात्री के हाथ-पैर हिलने शुरू हो गए।

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महिला डॉक्टर ने करीब 12 सेकेंड और सीपीआर दिया। 47 सेकेंड की सीपीआर देने के बाद पीड़ित यात्री उठकर बैठ गया। इसी बीच टीटी ने मेडिकल इमरजेंसी के बारे में रेवाड़ी स्टेशन पर सूचित किया और ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस मंगवा दी। रेवाड़ी स्टेशन पर यात्री को ट्रेन से उतारकर एंबुलेंस जरिए अस्पताल ले जाया गया, जहां पर जांच के दौरान पता चला कि उसके हार्ट की तीन नाड़ियां ब्लॉक थी।

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खाटू श्याम के दर्शन कर लाैट रहे थे स्वामी प्रसाद

पीड़ित यात्री की पहचान कपूरथला निवासी स्वामी प्रसाद के रूप में हुई। दरअसल श्री बालाजी सेवा संघ के नेतृत्व में श्रद्धालुओं का जत्था मेहंदीपुर बालाजी के दर्शन के बाद अजमेर-अमृतसर एक्सप्रेस में वापस लौट रहा था। इसी ट्रेन में कपूरथला के स्वामी प्रसाद भी अपने परिवार सहित खाटू श्याम के दर्शन करके लौट रहे थे। ट्रेन चरखी दादरी के पास पहुंची तो स्वामी प्रसाद बाथरूम गए और वहीं पर गिर गए। परिवार में हड़कंप मच गया। ट्रेन में मौजूद श्री बालाजी सेवा संघ के जत्थे में महिला डॉक्टर ईशा भारद्वाज भी शामिल थीं। डॉ. ईशा ने तुरंत स्वामी प्रसाद को सीपीआर दिया, जिससे उनकी जान बच गई। इसके बाद सभी यात्रियों ने ताली बजाकर डॉ. ईशा का शुक्रिया अदा किया और उनको चुनरी भेंट करके सम्मानित किया।

मरीज की सांस हो गई थी बंद 

डॉ. ईशा भारद्वाज ने बताया कि स्वामी प्रसाद की सांस बंद हो गई थी। वे पूरी तरह से बेसुध थे। उनकी जीभ बाहर आ गई थी, लेकिन गले और हाथ की नब्ज चल रही थी। सीपीआर देना शुरू किया तो करीब 35 सेकेंड के बाद उनके हाथ-पैर में हरकत शुरू हुई। इसके बाद 12 सेकेंड और सीपीआर देने के बाद वे उठकर बैठ गए।

बेटा बोला-भगवान के रूप में आई महिला डॉक्टर 

कपूरथला निवासी स्वामी प्रसाद के बेटे मनीष ने बताया कि उनको पिता की हार्ट प्रॉब्लम का पता नहीं था। ट्रेन में हार्ट अटैक आने के बाद उनका शरीर पूरी तरह बेजान हो गया था और वे असहाय महसूस कर रहे थे। मनीष ने कहा कि मेरे पिता और परिवार के लिए डॉ. ईशा भारद्वाज भगवान बनकर आई और पिता को नया जीवन दिया। इसलिए पूरा परिवार डॉ. ईशा का शुक्रगुजार है। मनीष ने बताया कि उनके पिता स्वामी प्रसाद की हालत अब स्थिर है। एक ऑपरेशन हो चुका है और एक और होना है। 

सीपीआर देने की जरूरत कब पड़ती है 

हार्ट अटैक में हृदय से रक्त पंप नहीं होता है। ऐसे में मरीज की जान बचाने के लिए सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिसुसिटेशन) देना पड़ता है। सीपीआर से दिल को फिर से चालू करने का प्रयास किया जाता है। यह बेहद सरल तकनीक है। सीपीआर देते समय मुख्य भाग छाती को दबाया जाता है। इसके लिए अपने एक हाथ को दूसरे हाथ के ऊपर रखते हैं और उसे व्यक्ति की छाती के बीच में रखकर पंप करते हैं। इससे दिल की धड़कन के वापस आने तक महत्वपूर्ण अंगों में रक्त का प्रवाह बना रहता है। वहीं ऑक्सीजन की सांस देने से कार्डियक अरेस्ट वाले व्यक्ति के फेफड़ों में अधिक ऑक्सीजन पहुंचती है।
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