पंजाब में सरकारी आर्थिक संकट की तपिश पेट्रोल पंप मालिकों का गणित भी बिगाड़ रही है। राज्य के पेट्रोल पंप मालिकों ने पुलिस समेत सरकार के विभिन्न विभागों को उधार में सप्लाई किए पेट्रोल और डीजल के बदले में चार करोड़ रुपये की पेमेंट लेनी है।
पंजाब पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने सूबे के चीफ सेक्रेटरी एवं डीजीपी को नोटिस (पत्र) भेज कर साफ किया है कि यदि उनके बकाया का भुगतान एक माह में नहीं किया गया तो राज्य के पेट्रोल पंप सरकारी वाहनों में उधार पेट्रोल डीजल नहीं भरेंगे।
एसोसिएशन के स्टेट प्रेसिडेंट जेपी खन्ना का कहना है कि पिछले छह माह से सरकारी विभागों से पेमेंट नहीं आई है, जबकि पंपों से उधार तेल भरवा कर सरकारी वाहन सड़कों पर सरपट दौड़ रहे हैं।
उधर पंप मालिकों की आर्थिक गाड़ी पटरी से उतर रही है। कई पेट्रोल पंप मालिकों ने सरकारी विभागों से पंद्रह-पंद्रह लाख रुपये तक की पेमेंट लेनी है।
खन्ना का कहना है कि सरकारी वाहन लगातार तेल भरवा रहे हैं और पेमेंट आने की रफ्तार काफी कम है, ऐसे में हर माह सरकारी बिल में दस लाख से अधिक का इजाफा हो रहा है। जबकि सारे पंप मालिक ऑयल कंपनियों से नकदी भुगतान कर पेट्रोल और डीजल की सप्लाई लेते हैं।
ऐसे में उधार तेल बेचना अब मुश्किल हो रहा है। खन्ना ने कहा कि सितंबर माह के दौरान उधारी से परेशान होकर चंडीगढ़ में सिटको ने पंजाब के वाहनों को तेल देने पर पाबंदी लगा दी थी।
खन्ना ने दावा किया कि सिटको का भी करीब नब्बे लाख उधार खड़ा हो गया था। तब सूबा सरकार ने आनन फानन में सिटको को पेमेंट की। उन्होंने सवाल किया कि यदि सिटको को पेमेंट हो सकती है तो पंजाब के पेट्रोल पंप मालिकों को क्यों नहीं।
खन्ना ने साफ किया है कि नोटिस की अवधि खत्म होते ही सरकारी वाहनों में किसी भी सूरत में उधार पेट्रोल-डीजल नहीं डाला जाएगा।