नगर निगम की हाउस की बैठक के दौरान शुक्रवार को साल 2016-17 का बजट पेश किया गया।
इस दौरान पार्षद प्रदीप गोला ने वार्ड की समस्याओं को लेकर निगम अधिकारियों से जमकर बहसबाजी हुई। इसका नतीजा कुछ भी नहीं निकला। बैठक में ऐसे कई पार्षद थे, जिनके वार्ड में आज तक किसी भी तरह का कोई काम नहीं हुआ। इसके बारे में मेयर बलवंत राय नाथ ने एक भी जवाब नहीं दिया, जिस कारण कई पार्षद मायूस दिखाई दिए। निगम की ओर से बैठक में 121.17 करोड़ का बजट पेश किया।
पार्षद अधिकारियों से विकास के लिए जारी भारी राशि के लिए होने वाली फंडिंग के बारे में जानकारी लेना चाहते थे। निगम पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, ऐसे में हर वार्ड के पार्षद अपने क्षेत्र में होने वाले विकास की सच्चाई जानने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। शहर में वाटर सप्लाई सीवरेज का काम देख रही त्रिवेणी इंजीनियरिंग कंपनी के खिलाफ विपक्षी दलों के साथ सत्ताधारी दल काफी नाराज दिखाई दिए।
इसमें लाइनपार क्षेत्र में आए दिन सीवरेज जाम की समस्या रहती है। इसे लेकर भाजपा की पार्षद अंजना रानी का कहना है कि उनके क्षेत्र में आए दिन सीवरेज जाम की समस्या रहती है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा। पार्षद जगरूप सिंह गिल ने कहा कि नगर निगम वकीलों की फीस कानूनी सलाह पर लाखों रुपये खर्च कर रहा है। इसके बावजूद उनके महत्वपूर्ण केस की पैरवी वकील सही ढंग से नहीं कर रहे हैं। इसमें सीधी जवाबदेही अधिकारियों की बनती है, जो लापरवाही कर रहे हैं। नगर निगम की बैठक में पार्षदों ने अधिकारियों की खूब खिंचाई की।
कांग्रेस ने लगाए भेदभाव के आरोप
नगर निगम की बैठक शुरू होने से पहले ही हाउस में विपक्ष के नेता व कांग्रेस के सीनियर पार्षद जगरूप सिंह गिल के अलावा पार्षद मलकीत सिंह, पार्षद बेअंत सिंह, पार्षद शैरी गोयल, पार्षद राम हलवाई व अन्य कांग्रेसी पार्षदों ने नगर निगम पर विकास कार्य करवाने में कांग्रेसी वार्डों के साथ भेदभाव करने के आरोप लगा दिए। वहीं नगर निगम की ओर से पेश किए गए बजट को लेकर लोगों का कहना था कि निगम हर साल बजट तो पेश करता है, लेकिन उनके लिए जो सुविधाएं होनी चाहिए, उसका बजट में कोई जिक्र तक नहीं किया जाता।