पंजाबी साहित्य अकादमी की ओर से नव वर्ष के आगमन पर शुक्रवार को पंजाबी भवन में कवि दरबार का आयोजन किया गया। इसमें अकादमी के वाइस प्रेसिडेंट सुरिंदर कैले, डॉ. गुरचरण कौर कोचर और डॉ. गुलजार सिंह पंधेर समेत कई साहित्यकार मौजूद रहे। सभी सदस्यों ने नव वर्ष की बधाई के साथ पंजाबी, पंजाबियत का झंडा और बुलंद करने का संकल्प लिया।
कवि दरबार में कुलविंदर कौर किरण ने अपनी गजल ‘काहतों मोह हो जादां उन्हां थावां नाल’ सुना कर खूब वाहवाही लूटी। त्रिलोचन झांडे ने अपनी गजल ‘मैं दिवाली मंगदा’ की पंक्तियां सुनाईं। डॉ. गुरचरण कौर कोचर ने अपनी गजल ‘नवां तां बस साल है, चढ़या तां बाकी सब पुराना है’ सुनाई।
सुमन शाम ने अपनी गजल ‘चलो मिल के दुआ करिए’ सुनाकर समां बांधा। इसके अलावा डॉ. गुलजार पंधेर, भगवान ढिल्लों, हरबंस मालवा, सुखचरणजीत कौर समेत कई कवियों ने अपनी नई गजलों, कविताएं सुनाई। इस अवसर पर प्रेम सिंह बजाज, सुरिंदर दीप, भूपिंदर धालीवाल, जगदीप दीप, बुध सिंह और बलकौर सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे।