फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ludhiana News: अदाकारी व कॉमेडी में कभी नहीं बिगड़ने दिया संतुलन

विज्ञापन
विज्ञापन
-डाॅ. जसविंदर भल्ला ने रील और रियल लाइफ में कभी फर्क नहीं रखा
विज्ञापन

-
राजीव शर्मा
लुधियाना। कॉमेडी किंग डाॅ. जसविंदर भल्ला उर्फ चाचा चतरा दुनिया को अलविदा कह अपने प्रशंसकों की यादों में सदा के लिए बस गए। डाॅ. भल्ला की जिंदगी के जज्बातों की छन छन से हर पल एक रोमांचक रिदम का अहसास होता था। उन्होंने अपनी अदाकारी एवं कॉमेडी में कभी सुर और ताल का संतुलन कभी बिगड़ने नहीं दिया और न ही कभी लय खोई, उन्होंने हमेशा ही संतुलित और गुदगुदाने वाली कॉमेडी के जरिये जहां लोगों को हंसाया, वहीं समाज की बुराइयों पर भी अपने व्यंग्य से हमेशा करारी चोट की। आज उनके साथ बिताए पलों को याद करके उनके मित्र, विद्यार्थी एवं सह-कलाकार गमगीन हैं।
जीवन के कुछ यादगार पहलू...
जब मंगेतर से मिलने से लगता था डर
विवाह से पहले जसविंदर से किसी ने कह दिया कि उनकी एक सगाई होकर टूट जाएगी। इसी डर के कारण उन्होंने अपनी सगाई से विवाह तक अपनी पत्नी से मुलाकात नहीं की, यहां तक की एक फोन भी नहीं किया। डाॅ. भल्ला रिंग सेरेमनी पर अपनी पत्नी परमदीप से मिले थे और उसके बाद विवाह पर ही मिले। 1987 में उनकी शादी हो गई।
विज्ञापन

गायक से बने कॉमेडी कलाकार
डाॅ. जसविंदर भल्ला को बचपन से ही गाने का शौक था। उनका पहला गीत जून 1974 में ऑल इंडिया रेडियो जालंधर से देहाती प्रोग्राम में प्रकाशित हुआ। केशो राम शर्मा उनके गुरु रहे और उनसे ही कला की बारीकियों को समझा और उसे अपने जीवन में उतारा।
मेहर मित्तल के फैन थे, भंडा दा प्रोग्राम से लगा कॉमेडियन का ठप्पा
बचपन से ही जसविंदर को पंजाबी कॉमेडी कलाकार मेहर मित्तल की फिल्में देखने का शौक था। स्टेज पर कंपेयरिंग कर लोगों को चुटकुले सुना जसविंदर ने अपनी पहचान बनाई लेकिन 1981 में सीनियर क्लास की फेयरवेल पार्टी में भंडा दा प्रोग्राम किया। वहीं से जसविंदर पर कॉमेडियन का ठप्पा लग गया।

पीएयू में प्रोफेसर थे, किसान मेलों के ब्रांड एंबेसडर भी रहे
अपने कलाकारी एवं अभिनय के जीवन के अलावा वे एक प्रोफेसर भी थे। वे पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू) में शिक्षक रहे और युवाओं के लिए एक गुरु के साथ साथ प्रेरणा स्रोत भी थे। उनके अचानक चले जाने से विश्वविद्यालय में भी शोक की लहर दौड़ गई। पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि डाॅ. भल्ला ने पीएयू से ही शिक्षा हासिल की और यहीं पर प्रोफेसर की जिम्मेदारी निभाई। पीएयू के किसान मेलों के वे हमेशा ब्रांड एंबेसडर रहे। वे स्किट्स और छोटे-छोटे नाटकों के जरिये किसानों को खेती से जुड़ी जानकारी देते और जागरूक करते थे। उनका यह योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।

मिलनसार और मस्तमौला
पीएयू के एडीशनल डायरेक्टर एवं डाॅ. भल्ला के विद्यार्थी रहे डाॅ. तेजिंदर सिंह रियाड़ का मन भी आज गमगीन था। डाॅ. रियाड़ ने वर्ष 1990 के दौर में डाॅ. भल्ला से शिक्षा ली थी। डाॅ. रियाड़ कहते हैं कि जिस तरह वे फिल्मों में सहज और सरल थे, असल जिंदगी में भी उतने ही मिलनसार और मस्तमौला थे। डॉ. रियाड़ ने कि पहले उनसे सीखा और फिर उनके साथ नौकरी करने का भी मौका मिला। अकसर हम कैंटीन में साथ खाना खाते थे। वे समय के बेहद पाबंद रहे और खाने-पीने के भी शौकीन थे। दो महीने पहले ही मेरी उनसे बात हुई थी, तब भी उनकी वही पुरानी सहजता झलक रही थी।
कक्षा में अनुशासन, लेक्चर में गंभीरता
उनके पूर्व छात्र डा. निर्मल जोड़ा ने पुरानी बातों को याद करते हुए कहा कि कॉलेज के पहले दिन हम सब उत्साहित थे कि हमें एक हास्य कलाकार से पढ़ने का मौका मिलेगा। लगा कि क्लास में खूब मजाक-मस्ती होगी, लेकिन डाॅ. भल्ला ने पूरे सेमेस्टर में अनुशासन बनाए रखा। उन्होंने पढ़ाई को पढ़ाई की तरह ही पढ़ाया। लेक्चर में कभी कॉमेडी की झलक तक नहीं दी। वे गंभीर और गहन अध्यापक थे।
विज्ञापन

किसानों और विद्यार्थियों के चहेते
डॉ. जसविंदर भल्ला के जीवन के दो पहलू थे। एक वे कॉमेडियन और दूसरे कृषि के विद्वान। वे पीएयू और किसानों में कड़ी का काम करते थे और वे अपनी कला के जरिये सहज भाव से किसानों तक पीएयू की सिफारिशों को पहुंचा कर उनको लागू कराते थे। अपनी कॉमेडी के जरिये वे लोगों में खुशियां बांटते रहे। तभी तो इतने कॉमेडियनों के बीच डाॅ. जसविंदर भल्ला एक सितारे की तरह चमकते रहे और उनकी कॉमेडी के किस्से लोगों के जहन में हमेशा तरोताजा रहेंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें