दुराचार के आरोप में भगोड़ा घोषित होने के बाद पिछले 58 दिन से पुलिस को चकमा देने वाला नारायण साईं लुधियाना के एक आश्रम में सिखों की वेशभूषा में बीते करीब बीस दिन से छिपा हुआ था।
पुलिस के मुताबिक नारायण साईं को लुधियाना के एक भक्त पंकज सक्सेना ने पनाह दी। वह उसकी लग्जरी कारों में घूमता रहा।
कुछ दिन पहले लुधियाना के एक फोटो पत्रकार को इसकी भनक लगी तो उसने आश्रम में गया लेकिन साईं के समर्थकों ने उसके साथ हाथापाई की।
इसकी शिकायत जब पुलिस से की गई लेकिन लुधियाना पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। पुलिस ने अगर सक्रियता दिखाई होती तो नारायण साई पंजाब पुलिस की गिरफ्त में होता।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के डीसीपी कुमार गणेश और एसीपी केपीएस मल्होत्रा की टीम को दो दिसंबर को पुख्ता सूचना मिली कि नारायण साईं व उसका सहायक हनुमान पिछले 20 दिनों से लुधियाना के साहनेवाल स्थित एक आश्रम में छिपे हैं।
3 दिसंबर को टीम ने लुधियाना पुलिस को बिना सूचना दिए आश्रम में दबिश दी लेकिन साईं तब तक फरार हो चुका था।
इसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम पंजाब के ही कई जिलों में साईं की तलाश करती रही। इसी दौरान क्राइम ब्रांच को साईं द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल की लोकेशन लुधियाना-दोराहा के बीच मिली। पुलिस की टीम ने इसका पीछा किया। दोराहा में टीम ने कुछ वाहनों की तलाशी भी ली क्योंकि उन्हें सूचना थी कि साईं अपनी कार बदल सकता है। टीम पीछा करते कुरुक्षेत्र के पिपली पहुंची जहां एक पेट्रोल पंप पर खड़ी गाड़ी में नारायण साईं को दबोच लिया गया।