नेहरू सिद्धांत केंद्र में आयोजित 44वें जश्न-ए-साहिर अंतरराष्ट्रीय मुशायरे में करीब 18 शायर देश विदेश से साहिर लुधियानवी और कृष्ण अदीब की धरती को सजदा करने पहुंचे।
कई युवा शायर पहली बार लुधियानवियों से मुखातिब हुए। पार्श्व गायिका मंजरी और फरहत शहजाद (यूएसए) को जहां साहिर अदीब अवार्ड से नवाजा गया। मंजरी ने मेहंदी साहिब की गजल गजब किया तेेरे वादे पे इतबार किया, तमाम रात कयामत का इंतेजार किया से दर्शकों का मन मोहा। वहीं, महफिल में उतरे कुछ नए चेहरों से अपनी शायरी की गहरी छाप छोड़ी।
रुड़की के शायर महश्र आफरीदी ने अपनी बुलंद आवाज में मेरा कातिल परेशान है मेरी मां की दुआओं से, कि वो वार करता है, तो खंजर टूट जाता है। सहित कई शेर पेश कर खूब तालियां बटोरी। रुड़की के ही सज्जाद झंझट ने अपने चिरपरिचित अंदाज में शेर पढ़ लोगों को खूब गुदगुदाया। महफिल के सूत्रधार मोइन ने अपने शेर तुम शराफत कहां बाजार में ले आए हो, यह वह सिक्का है जो बरसों से चला नहीं पर खूब वाहवाही लूटी।
आयोजन के प्रमुख मेजबान स्वर्गीय ओम प्रकाश मुंजाल की तस्वीर साहिर के समानांतर लगाई गई। मुशायरे में शकील आजमी, मलिकाजादा जावेद, सुरिंदर शजर, मोइद रशीदी ने देर रात तक लोगों को बांधे रखा।
गायकी व कविता के लिए दिल में दर्द होना जरूरी: मंजरी
मंजरी ने बताया कि उन्होंने पाक के उस्ताद खालिद अनवर जान से संगीत की शिक्षा हासिल की है, लेकिन वह कभी पाक नहीं जा सकी है। अब वह पाक में कार्यक्रम आयोजित करने की सोच रही हैं, यहीं उस्ताद जी को श्रद्धांजलि होगी। मूल रुप से केरल निवासी मंजरी ने बताया कि जब तक दिल में दर्द न हो तो गायकी या कविता में दर्द नहीं हो सकता। उन्होंने भी दिल टूटने का दर्द सहा है।
उनके पसंदीदा गजल गायक मेहंदी हसन, जगजीत सिंह, अहमद फराज के साथ-साथ रोशन आरा बेगम, मधु रानी, नूर जहां और बेगम अख्तर आदि हैं। पंजाबी संगीत संबंधी पूछे प्रश्न के उत्तर में उन्होंने दलेर मेहंदी का नाम लेते हुए कहा कि पंजाबी संगीत का मतलब जोश है।