-उद्योग से लेकर खेत-खलिहान तक प्रवासियों पर टिकी है पंजाब की अर्थव्यवस्था
-आठ लाख प्रवासी सिर्फ लुधियाना में, पूरे पंजाब में 18 लाख से ज्यादा मजदूर सक्रिय
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राजीव शर्मा
लुधियाना। पंजाब की तरक्की में प्रवासी मजदूरों की भूमिका बेहद अहम रही है। उद्योगों से लेकर खेती-बाड़ी और दुकानों से लेकर घरों तक, प्रवासी मजदूरों की मेहनत पर ही पंजाब की रौनक टिकी हुई है। प्रदेश में इस समय 18 लाख से अधिक प्रवासी मजदूर काम कर रहे हैं। इनमें से सिर्फ लुधियाना की औद्योगिक इकाइयों में आठ लाख से ज्यादा मजदूर शामिल हैं लेकिन पंजाब में कुछ संगठनों की ओर से प्रवासी मजदूरों के खिलाफ बनाया जा रहा माहौल सूबे के लिए बड़ी खतरे की घंटी है। इसे लेकर औद्योगिक संगठन खासे चिंतित हैं। उनका तर्क है कि सरकार को वक्त रहते ही ठोस उपाय करने होंगे।
80 फीसदी असंगठित श्रमिक प्रवासी
पंजाब के उद्योग जगत का कहना है कि 80 प्रतिशत असंगठित मजदूर प्रवासी हैं। यही हाल खेती का भी है। खेतों की बुआई और कटाई का बड़ा हिस्सा इन्हीं मजदूरों के भरोसे पूरा होता है। व्यापारियों का कहना है कि प्रवासी मजदूर मेहनती होते हैं और ज्यादातर गैर-आपराधिक प्रवृत्ति के होते हैं। इस वजह से उनके साथ काम करना आसान रहता है।
आंदोलन ने बढ़ाई चिंता
पंजाब में हाल ही में कुछ संगठनों की ओर से प्रवासी मजदूरों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन शुरू किए गए हैं। उद्योग जगत और सामाजिक संगठनों ने इसे साजिश बताया है। उनका कहना है कि यदि प्रवासी मजदूर पंजाब छोड़कर चले गए तो न सिर्फ यहां की फैक्टरियां बंद होंगी बल्कि पंजाब की पूरी अर्थव्यवस्था भी डगमगा जाएगी।
दूसरे राज्यों से रिश्ते बिगड़ने
का डर
उद्योगपतियों और विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति ज्यादा बिगड़ी तो दूसरे राज्यों से पंजाब के रिश्ते खराब हो सकते हैं। आशंका जताई जा रही है कि पंजाब से जाने वाले माल की आपूर्ति पर रोक लग सकती है और निर्यात पर भी असर पड़ेगा।
50 लाख पंजाबी भी कर रहे प्रवास
जानकारों ने यह भी याद दिलाया कि पंजाब के 50 लाख से अधिक लोग खुद देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों में रोज़ी-रोटी कमा रहे हैं। ऐसे में प्रवासी मजदूरों को निकालने जैसी कोशिशें पंजाबियों के लिए भी खतरा बन सकती हैं।
संविधान के खिलाफ आंदोलन
भारत संघीय ढांचे वाला देश है। संविधान के तहत किसी भी राज्य को यह अधिकार नहीं कि वह दूसरे राज्यों के नागरिकों को बाहर निकाले। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रवासी मजदूरों के खिलाफ हो रहा आंदोलन न केवल असंवैधानिक है बल्कि पंजाब विरोधी भी है।
सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग
वर्ल्ड एमएसएमई फोरम ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से आग्रह किया है कि प्रवासी मजदूरों पर हो रहे हमले और विरोध को तुरंत रोका जाए। फोरम के प्रधान बदीश जिंदल का तर्क है कि यदि सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए तो मजदूरों के साथ-साथ उद्योग भी पंजाब से पलायन कर जाएंगे। इससे न सिर्फ पंजाब की तरक्की पर ब्रेक लगेगा बल्कि लाखों लोगों का रोजगार भी खतरे में पड़ जाएगा।
मौजूदा ट्रेंड सूबे को धकेलेगा गंभीर श्रमिक संकट में
ऑयल मिल मशीनरी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ललित शौरी का कहना है कि पंजाब में प्रवासी मजदूरों के खिलाफ तैयार हो रहा माहौल सूबे को गंभीर श्रमिक संकट की तरफ धकेल सकता है। इसका खामियाजा पंजाब को भुगतना होगा और यहां का सारा ताना-बाना बिगड़ जाएगा। वक्त रहते ही सरकार को इस दिशा में ठोस उपाय करने होंगे, अन्यथा पंजाब के नुकसान की भरपाई करना असंभव होगा।