मथुरा में नाव हादसे में मारे गए पांच लोगों के शव जगरांव लाए गए हैं। एक साथ पांच चिताएं जली तो माहाैल गमगीन हो गया। हादसे में जगरांव के ईशान कटारिया, कपूर काॅलोनी कच्चा मलक रोड, मधुर बहल व मां कविता रानी, गीता काॅलोनी, चरनजीत सिंह काला और उनकी पत्नी शामिल हैं। मृतकों के घरों में मातम पसरा हुआ है।
वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जगरांव पहुंचकर मृतकों को नमन दिया। लुधियाना के सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की पत्नी ने भी मृतकों को श्रद्धांजलि दी।
वहीं नाव हादसे में डूबने से लुधियाना की मीनू की माैत हुई थी। आज उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दाैरान धार्मिक, सामाजिक संगठनों के लोग माैजूद रहे। सभी ने नम आंखों से मीनू को अंतिम विदाई दी।
गुरुवार शाम को रवाना हुए थे 120 लोेग
श्री बांके बिहारी क्लब द्वारा हर माह की तरह वीरवार शाम को डिस्पोजल रोड से वृंदावन के लिए रवाना हुई दो लग्जरी बसों में कुल 120 लोग सवार थे जो शुक्रवार सुबह 10 बजे सकुशल वृंदावन पहचे।
इस दौरान ज्यादातर श्रद्धालु धर्मशाला में ही आराम करने अपने-अपने कमरों में रुक गए जबकि वहां से 30 के करीब श्रद्धालु बांके बिहारी मंदिर में माथा टेकने के बाद यमुना नदी में चले गए। इस दौरान उनकी स्टीमर नाव दरिया के अंदर ही बना रहे टेंपरेरी पीपा पुल से टकराने के बाद वहीं यमुना में ही डूब गई।
उधर, लुधियाना के डीसी हिमांशु जैन का कहना है कि मथुरा में हुए नाव हादसे में ज्यादातर लोग जगरांव के हैं। इस संबंध में प्रशासन पीड़ितों के परिजनों की सहायता के लिए कंट्रोल रूम स्थापित कर रहा है। इसके अलावा प्रशासन मथुरा के जिला प्रशासन के साथ संपर्क से हैं। वहां के डीएम से भी बात की गई है। साथ ही प्रशासन पीड़ित परिवारों से संपर्क साधने का प्रयास कर रहे हैं। जिंदा बाहर निकाले गए श्रद्धालुओं में जगरांव के रहने वाले सुनील कुमार की पत्नी, यशु पुत्र रमेश बजाज और लवेश के नाम सामने आए हैं, जिनकी फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं है परंतु उन्हें वहां के रामकृष्ण मिशन अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।
इसके अलावा मोगा और लुधियाना के दुगरी का एक श्रद्धालु भी अस्पताल में ही है। जानकारी के मुताबिक 9 अप्रैल को जगरांव के श्री बांके बिहारी क्लब की तरफ से दो बसों में पर्यटकों को ले जाया गया था। वृंदावन की 4 दिन की यात्रा थी, जिनका 4500 रुपया किराया लिया गया था। बस में जगरांव के ज्यादातर श्रद्धालु थे इसके अलावा लुधियाना मोगा और मुक्तसर के कुछ लोग भी बसों में सवार थे। इस हादसे की सूचना मिलते ही जगरांव में मातम छा गया। पीड़ित परिवारों के परिजन यह खबर सुनते ही मथुरा के लिए रवाना हो गए।
श्रद्धालुओं में शामिल मल्होत्रा मोबाइल के शोरूम में काम करते श्वेत जैन ने मथुरा से बताया कि यमुना में पीपों का पुल बनाया गया था। जलस्तर बढ़ने के बाद इन्हें खोल दिया गया। इसके बाद यह पुल यमुना में बहने लगे। इनसे टकराकर ही स्टीमर पलटा। श्वेत जैन के मुताबिक हादसा दोपहर करीब 3 बजे केसी घाट पर हुआ जो श्री बांके बिहार मंदिर से ढाई किमी की दूरी पर है।
उन्होंने बताया कि जब किश्ती डूबी तो आसपास के किश्ती वालों ने कईयों को बचा कर अपनी किश्ती में बिठा लिया। 6 से 7 लोगों के शव तो वह यहां पर अस्पताल में देख चुके हैं। उन्होंने बताया कि जगरांव के ज्यादातर श्रद्धालु वृंदावन में फोगला आश्रम के पास रुके हैं।
श्वेत ने बताया कि नाविक को कहा कि रोक लो। श्वेत जैन के मुताबिक हमारा स्टीमर जब पीपा पुल के पास पहुंचा तो हम लोगों ने नाविक से कहा कि पुल आने वाला है, रोक लीजिए लेकिन उसने नहीं रोका। 2 बार स्टीमर टकराने से बचा। तीसरी बार में टक्कर हो गई। पास में कुछ गोताखोर थे जिन्होंने हमें बचाया है।
श्रद्धालुओं के साथ ही वृंदावन गई जगरांव के सीनियर एडवोकेट संदीप गुप्ता की पत्नी सीमा गुप्ता ने बताया कि बताया कि आश्रम में से 120 लोगों में से 25 से 30 लोग ही यमुना देखने और मंदिर में माथा टेकने गए थे जिन में ज्यादातर नौजवान श्रद्धालु ही शामिल थे। उन्होंने कहा कि दोपहर 3:00 बजे हुए हादसे के बाद जैसे ही आश्रम में बैठकर बाकी श्रद्धालुओं को इस बाबत जानकारी मिली तो सभी का रो-रो कर बुरा हाल हो गया।