सूरत सिंह खालसा की नाजुक हालत को देखते हुए प्रशासन ने उनको डीएमसी अस्पताल में दाखिल करा दिया। जहां डाक्टरों की टीम उनकी गहन निगरानी कर रही है। खालसा बंदी सिखों की रिहाई के लिए 16 जनवरी से भूखहड़ताल कर रहे हैं।
खाने पीने का वीडियो सामने आने के बाद खालसा ने पानी भी त्याग दिया था, इससे उनकी हालत खराब हो रही थी। देर रात सिविल अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने तीन बार उनके स्वास्थ्य की जांच की। सुबह करीब चार बजे एसपी-डी बहादुर सिंह और मेडिकल टीम के सदस्य परिवार के विरोध के बावजूद उनको एंबुलेंस में डालकर अस्पताल ले गए।
खालसा के बेटे रविंदरजीत सिंह गोगी ने कहा कि देर रात पहले बारह बजे, फिर दो बजे खालसा का मेडिकल चेकअप किया गया। गोगी ने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार खालसा का खाना खाने का वीडियो वायरल करके सिख कौम को गुमराह कर रही है, जबकि दूसरी तरफ खुद ही अस्पताल में नजरबंद करके धक्केशाही से इलाज कर रही है। गोगी ने कहा कि बुधवार को सीएम प्रकाश सिंह बादल के प्रतिनिधि के तौर पर डॉ. दलजीत सिंह चीमा आए थे, लेकिन उनके पास भी ठोस अधिकार नहीं थे।
गोगी ने कहा कि सरकार ने संघर्ष कमेटी से खालसा की मांगों की जानकारी मांगी है। जबकि पहले ही 79 बंदी सिखों की सूची सरकार को दी जा चुकी है। सरकार को पहले ही बताया जा चुका है कि यदि सरकार पंजाब की जेलों में बंद चार सिख कैदी दिलबाग सिंह बंगा, स्वर्ण सिंह फिरोजपुर, नंद सिंह राजपुरा और सुबेग सिंह राजपुरा को रिहा करती है तो खालसा पानी पीना शुरू कर देंगे। शिक्षा मंत्री को यह भी कहा गया कि लुधियाना डकैती केस में शामिल दस सिखों के केस खत्म किए जाएं। संघर्ष कमेटी के ज्यादातर नेताओं को सरकार ने विभिन्न जेलों में बंद कर रखा है। यदि सरकार बंदी सिखों की रिहाई के लिए गंभीर है तो कमेटी के बाकी सदस्यों को बातचीत के लिए भेजा जाएगा। यदि सरकार ने जिला प्रशासन से बातचीत को कहा तो उसे अस्वीकार कर दिया जाएगा। कमेटी सिर्फ सरकार से बातचीत करेगी। इस अवसर पर बगीचा सिंह, अमृतपाल सिंह और जोगा सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे।