कृषि कानूनों और बिजली संशोधन बिल 2020 को रद्द कराने के लिए कुल हिंद किसान सभा ने गढ़शंकर चंडीगढ़ रोड पर स्थित एक पेट्रोल पंप पर धरना दिया। धरने की अगुवाई सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष दर्शन सिंह मट्टू ने की। कैप्टन करनैल सिंह व बीबी सुभाष मट्टू ने किसान संघर्ष का समर्थन किया।
अच्छर सिंह बिल्ड़ों ने कृषि कानून और बिजली संधोधन विधेयक के रद्द होने तक संघर्ष का जारी रखने का एलान किया। इस मौके पर मास्टर बलवीर सिंह इब्राहिमपुर, अमरजीत सिंह कुल्लेवाल, पूर्व सरपंच बीर इंद्र सिंह सिंबली, मास्टर अवतार सिंह थाना, मेजर सिंह कालेवाल लल्लियां, मास्टर चरन दास पद्दी सूरा सिंह, डॉ. जोगिंद्र कुल्लेवाल, मास्टर बलवंत राय मौजूद रहे।
मुक्तसर: किसानों के धरनों में पहुंचे पूर्व सैनिक
कृषि कानूनों के विरोध में किसान यूनियन की ओर से रेलवे स्टेशन और गांव वड़िंग के नजदीक टोल प्लाजा पर चल रहे धरनों में बुधवार को पूर्व सैनिकों ने शिरकत की। इंडियन एक्स सर्विस लीग के जिलाध्यक्ष बलवंत सिंह भुल्लर, पूर्व सूबेदार जसविंदर सिंह, बलविंदर सिंह, बोहड़ सिंह, मेजर सिंह, आत्मा सिंह, सुखदेव सिंह, सुरिंदर सिंह व कैप्टन मुख्तयार सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक केंद्र सरकार कृषि कानून रद्द नहीं करती, वह किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे।
वहीं टोल प्लाजा पर धरने पर बैठे भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धपुर के जिला प्रधान पूरन सिंह वट्टू, ब्लाक प्रधान गुरदेव सिंह, इकाई प्रधान जसवीर सिंह आदि ने कहा कि यूपी तथा अन्य सूबों से आए धान के ट्रक रोक कर रखे गए हैं। ट्रकों के मालिक नहीं आ रहे हैं। चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द मालिक नहीं आए तो ट्रकों को कब्जों में ले लिया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि दूसरे राज्यों से पंजाब में धान बेचने आ रहे ट्रक चालकों और मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
लुधियाना: किसानों के समर्थन में लगाया जाम
आंगनबाड़ी मुलाजिम यूनियन ने बुधवार को सीटू के साथ कृषि कानूनों के खिलाफ गिल नहर पुल पर जाम लगाकर रोष प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। एक घंटे बाद प्रदर्शनकारी चले गए। इसके बाद दोनों तरफ लगा करीब चार किमी लंबा जाम खुला और लोगों को राहत मिली।
प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने सत्ता में आने के बाद कॉरपोरेट घरानों के विकास पर जोर दिया है। नए कृषि कानूनों से यह बात साफ हो गई है कि केंद्र सरकार पूंजीपतियों की हिमायती है। किसानों को बुलाने के बावजूद बैठक नहीं की गई। कृषि कानूनों से किसानों के अलावा मजदूरों को भी नुकसान झेलना पड़ेगा।
कॉरपोरेट घराने अपनी मनमर्जी से किसानों की फसलों के दाम तय करेेंगे। आज पांच साल के बच्चे से लेकर 90 साल के बुजुर्ग तक किसानों के हक में प्रदर्शन कर रहें हैं। आंगनबाड़ी मुलाजिम यूनियन का किसानों के हक में संघर्ष लगातार जारी रहेगा। पंजाब के किसानों के आगे मोदी सरकार को झुकना ही पड़ेगा ।
आंगनबाड़ी मुलाजिम यूनियन और सीटू की तरफ से लगाए गए एक घंटे के जाम ने शहर का आवागमन रोक दिया। लोगों को अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए प्रदर्शनकारियों से बहस करनी पड़ी। मरीज को लेने जा रही एंबुलेंस भी जाम में फंसी रही। एंबुलेंस हूटर मारती रही। प्रदर्शनकारियों ने किसी वाहन को नहीं जाने दिया। इससे एक घंटे तक एंबुलेंस जाम में फंसी रही।
फरीदकोट: आरएसएस नेता के घर के बाहर प्रदर्शन
पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन व नौजवान भारत सभा की प्रांतीय कमेटी के आह्वान पर बुधवार को दोनों जत्थेबंदियों ने सादिक चौक के पास आरएसएस नेता डॉ. दीपक गोयल के घर के बाहर खेती कानूनों के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया गया। इस दौरान आरएसएस व भाजपा का पुतला भी फूंका गया।
इस मौके पर स्टूडेंट यूनियन के जिला प्रधान केशव आजाद व सभा के प्रांतीय नेता नौनिहाल सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार के 3 खेती कानूनों से जहां बड़े घरानों की कंपनियों के लिए किसानों की जमीन पर कब्जा करने का रास्ता साफ हुआ है, वहीं किसानी से जुड़े मजदूर, आढ़ती, व्यापारी व मंडीकरण के कर्मचारियों के सामने भुखमरी व बेरोजगारी की नौबत आ गई है।
किसान जत्थेबंदियों की ओर से रेलवे ट्रैक, टोल प्लाजा, रिलायंस पंपों समेत भाजपा नेताओं के घर के बाहर धरने दिए जा रहे हैं। अब आरएसएस नेताओं के घरों का घेराव शुरू किया गया है। इस मौके पर आरएसएस वर्करों व जत्थेबंदियों के बीच तनाव का माहौल भी हो गया था लेकिन सूझबूझ से मामला शांत कराया गया।
संगरूर: किसान संगठनों ने घेरा डीसी ऑफिस
बाहरी राज्यों से आ रहे धान पर रोक न लगाने के रोष स्वरूप किसान संगठनों ने बुधवार को डीसी दफ्तर का घेराव कर जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने करीब एक घंटा डीसी दफ्तर को घेरे रखा। किसान नेताओं ने कहा कि एक तरफ जहां केंद्र सरकार के काले कानून के कारण किसानों को अपना भविष्य धुंधला नजर आ रहा है, वहीं पंजाब सरकार विधानसभा में विधेयक पास करके किसानों से हमदर्दी जताने की कोशिश कर रही है।
दूसरी तरफ पंजाब में यूपी, बिहार से मंडियों में सस्ते भाव में धान लाकर बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि संगरूर में बाहर से धान लाया जा रहा है लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई न हुई तो आगामी दिनों में संगरूर प्रशासन के खिलाफ संघर्ष तेज किया जाएगा।
इस मौके पर भाकियू सिद्धूपुर के जिलाध्यक्ष सुरजीत सिंह फतेहगढ़ भादसों, भाकियू डकौंदा के प्रदेश उपाध्यक्ष गुरमीत सिंह भट्टीवाल, किरती किसान यूनियन के यूथ विंग के प्रदेश कनवीनर भूपिंदर सिंह लौंगोवाल, भाकियू राजेवाल के प्रदेश सचिव नरंजन सिंह दोहला, कुल हिंद किसान सभा के नेता जरनैल सिंह जनाल मौजूद रहे।