पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
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इस्सेवाल सामूहिक दुष्कर्म मामले में पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पंजाब सरकार कितनी संजीदगी से काम कर रही है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि मुख्य आरोपी जगरूप सिंह उर्फ रूपी जमानत पर बाहर है। पंजाब सरकार उसकी जमानत रद्द करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका तक दायर नहीं कर पाई है।
सरकार का पूरा केस तैयार हो चुका है, लेकिन एडवोकेट जनरल से औपचारिक अनुमित नहीं मिली है। दूसरी तरफ पीड़िता अपने निजी वकील के जरिये सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुकी है। उसकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 12 फरवरी की तारीख लिस्ट हुई है।
इस्सेवाल सामूहिक दुष्कर्म मामले के मुख्य आरोपी जगरूप सिंह उर्फ रूपी ने अपने पांच अन्य दोस्तों के साथ मिलकर नौ फरवरी 2019 की रात सामूहिक दुष्कर्म किया था। 28 दिसंबर 2020 को जगरूप सिंह को हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। जमानत मिलने पर पीड़िता और उसके वकील ने आरोप लगाया था कि जमानत याचिका के दौरान सरकार ने सही तरीके से पीड़िता का पक्ष नहीं रखा। अब फाइल एडवोकेट जनरल दफ्तर से औपचारिक अनुमति के इंतजार में है। वहां हो रही देरी होने के कारण पंजाब सरकार अब तक सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर नहीं कर सकी है।
ऐसा चलता रहा तो मामला एक साल और लटक जाएगा
इस्सेवाल सामूहिक दुष्कर्म मामले में जांच दल की मुखिया एडीजीपी वी नीरजा ने बताया कि 22 दिसंबर को मुख्य आरोपी को जमानत मिली थी, इसके तुरंत बाद एसएसपी ग्रामीण चरणजीत सिंह ने सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी शुरू कर दी थी। 22 जनवरी 2021 को गृह विभाग ने याचिका दायर करने की अनुमति प्रदान की।
इसके बाद एलजी दफ्तर से औपचारिक अनुमति जरूरी है। 8 फरवरी तक यह अनुमति नहीं मिल पाई है। पुलिस ने पहले भी गंभीरता से काम किया था, 40 दिन में चालान पेश कर मजबूत मुकदमा बनाया। ऐसे गंभीर मामलों में सेंस आफ इंपोर्टेंस जरूरी है। जबकि पीड़िता ने अपने निजी वकील के माध्यम से सुप्रीमकोर्ट में याचिका डाल दी है, जिसे 12 फरवरी के लिए लिस्ट किया गया है। पुलिस औपचारिक अनुमति का इंतजार कर रही है, ऐसा चलता रहा तो मामला एक साल और लटक जाएगा।
मुख्य आरोपी जगरूप सिंह की जमानत होने पर निराशा हुई है, लेकिन उम्मीद नहीं छोड़ी है। आरोपी की जमानत रद्द करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी गई है। उम्मीद है कि उसकी जमानत जरूर रद्द होगी। वॉइस सैंपल व डीएनए जांच करने वाले फॉरेंसिक विभाग के डायरेक्टर की गवाही के लिए याचिका दायर करने जा रहे हैं। वह अभी तक गवाहों की लिस्ट में नहीं थे। उनकी गवाही आरोपियों को सजा दिलाने में अहम रोल अदा करेगी। निर्भया कांड के बाद जुवेनाइल जस्टिस केयर एंड प्रोटेक्शन एक्ट 2015 आ चुका है, इसमें नाबालिग के दिमाग की जांच कराने के बाद सही पाए जाने पर 20 साल की सजा का प्रावधान है। इस मामले में भी यही होगा। -हरदयाल इंदर सिंह ग्रेवाल, पीड़िता के वकील।